सावन का महीना हिंदू धर्म में भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने देवों के देव महादेव सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी स्वयं संभालते हैं। पंचांग के अनुसार यह वर्ष का पांचवां महीना होता है। इस बार सावन की शुरुआत 30 जुलाई से हुई है और इसका समापन 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के दिन होगा। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, विधि-विधान से पूजा और श्रद्धा के साथ भगवान शिव का स्मरण करना काफी पुण्यदायी माना गया है। तो आइए जानते हैं।
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वास्तु के ये नियम बदल सकते हैं घर का माहौल
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सावन में है घर में नए पौधे लगाने की परंपरा
सावन का नाम आते ही मन में हरियाली, बारिश की ठंडी फुहारें और प्रकृति की ताजगी का एहसास होने लगता है। इस मौसम में वातावरण पूरी तरह बदल जाता है और पेड़-पौधे नई ऊर्जा से भर उठते हैं। यही कारण है कि इस पावन महीने में घर में नए पौधे लगाने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। इनमें भी तुलसी का पौधा सबसे शुभ माना गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार सावन में तुलसी रोपने से घर की नेगेटिव एनर्जी दूर होती है और परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
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इन वास्तु नियमों का रखें ध्यान
हालांकि तुलसी का पौधा लगाते समय कुछ वास्तु नियमों का पालन करना जरूरी बताया गया है। सबसे पहले इसकी दिशा का ध्यान रखें। तुलसी को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। इन दोनों दिशाओं में तुलसी का पौधा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और शुभ फल प्रदान करता है।
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घर में लटका कर नहीं रखें तुलसी का पौधा
आजकल घरों की सजावट के लिए हैंगिंग पॉट का ट्रेंड बढ़ गया है, लेकिन तुलसी के पौधे को कभी भी लटका कर नहीं रखना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और बनते हुए कार्यों में भी बाधाएं आ सकती हैं।
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चौकोर आकार का गमला है सबसे अच्छा
गमले का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। तुलसी के लिए हमेशा चौकोर आकार का गमला उपयोग करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि चौकोर गमले में लगाया गया तुलसी का पौधा अधिक शुभ फल देता है। वहीं सावन में लगातार बारिश और नमी के कारण गमले में पानी जमा होने की संभावना रहती है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद अवश्य हो ताकि जड़ें सड़ने से बची रहें।