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Pongal 2023 Date: चार दिनों का होता है पोंगल पर्व, जानिए हर दिन का महत्व और परंपरा

Sat, 14 Jan 2023 07:56 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sat, 14 Jan 2023 07:56 AM IST
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Pongal 2023 know significance importance and who is worshiped on the four days of pongal
चार दिनों तक चलने वाले पोंगल पर्व की खास बातें - फोटो : अमर उजाला

Pongal 2023 Date: सूर्य के उत्तरायण होने पर दक्षिण भारत में पोंगल का त्योहार मनाया जाता है। पोंगल दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक है। ये मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन तमिल नववर्ष का आरंभ भी होता है। सूर्य पोंगल पर खीर बनाकर सूर्यदेव को भोग लगाने का विधान है। मान्यता है कि दक्षिण भारत में धान की फसल काटने के बाद लोग अपनी प्रसन्नता प्रकट करने के लिए पोंगल का त्योहार मनाते हैं। इस दिन लोग समृद्धि लाने के लिए वर्षा, धूप, सूर्य, इंद्रदेव और खेतिहर पशुओं की पूजा-आराधना की जाती है। ये उत्सव पूरे चार दिनों तक चलता है। प्रत्येक दिन का अपना महत्व होता है। चलिए जानते हैं इन चारों दिनों में किस दिन क्या किया जाता है...



Pongal 2023: कब है पोंगल का त्योहार? जानें इस पर्व से जुड़ी परंपरा और महत्व 

Pongal 2023 know significance importance and who is worshiped on the four days of pongal
चार दिनों तक चलने वाले पोंगल पर्व की खास बातें - फोटो : amar ujala

पहला दिन
पोंगल के पहले दिन इंद्र देव की पूजा की जाती है। इस पूजा को भोगी पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन वर्षा के लिए भगवान इंद्र का आभार प्रकट करते हुए जीवन सुख और समृद्धि की कामना की जाती है। पोंगल के पहले दिन लोग अपने पुराने हो चुके सामानों की होली जलाते हुए नाचते हैं।

Pongal 2023 know significance importance and who is worshiped on the four days of pongal
चार दिनों तक चलने वाले पोंगल पर्व की खास बातें - फोटो : iStock

दूसरा दिन
पोंगल पर्व के दूसरे दिन सूर्य देवता की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य के उत्तरायण होने के बाद सूर्य देव का आभार प्रकट किया जाता है। एक विशेष खीर बनाई जाती है, जिसे पोंगल खीर कहा जाता है। दूसरे दिन को सूर्य पोंगल के तौर पर मनाया जाता है।

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Pongal 2023 know significance importance and who is worshiped on the four days of pongal
चार दिनों तक चलने वाले पोंगल पर्व की खास बातें - फोटो : iStock

तीसरा दिन
इस पर्व में तीसरे दिन पशुओं की पूजा होती है। इसे मट्टू पोंगल के नाम से जाना जाता है। इसमें लोग मट्टू यानी बैल की विशेष रूप से पूजा करते हैं। अपने पशुओं का आभार व्यक्त करने के लिए इस दिन गाय और बैलों को सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन बैलों की दौड़ का भी आयोजन किया जाता है, जिसे जलीकट्टू कहते हैं।

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Pongal 2023 know significance importance and who is worshiped on the four days of pongal
चार दिनों तक चलने वाले पोंगल पर्व की खास बातें - फोटो : iStock

चौथा दिन
चौथा दिन पोंगल पर्व का आखरी दिन होता है। इस दिन को कन्या पोंगल के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों को फूलों और पत्तों से सजाया जाता है। आंगन और घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाई जाती है। कन्या पूजन कर लोग एक-दूसरे को पोंगल की बधाईयां देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

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