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पवित्रा एकादशी: आज इस तरह करें भगवान विष्णु की पूजा, पैसों की कमी होगी दूूर

Thu, 03 Aug 2017 09:38 AM IST
amarujala.com- presented by: विनोद शुक्ला
amarujala.com- presented by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 03 Aug 2017 09:38 AM IST
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pavitra ekadashi vrat falls on 3 august 2017

आज श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इस एकादशी को पुराणों में पवित्रा एकादशी नाम दिया गया है। धर्म शास्त्रों में इसका नाम पुत्रदा एकादशी भी बताया गया है। इस एकादशी के विषय में मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति श्रद्घा और नियम पूर्वक इस व्रत का रखता है उसके पूर्व जन्म के पाप कट जाते हैं और संतान एवं धन-संपदा का सुख प्राप्त होता है।

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शास्त्रों में बताया गया है कि पवित्रा एकादशी का व्रत करने वाले को प्रातः काल स्नान ध्यान करके भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। पूरे दिन व्रत रखकर संध्या के समय भगवान की पुनः पूजन करने के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं। रात्रि जागरण करके भगवान का भजन कीर्तन करें। अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को ब्रह्मणों को भोजन करवाएं और दान-दक्षिणा सहित विदा करें।

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इस प्रकार जो व्यक्ति पवित्रा एकादशी का व्रत करता है उसके वाजपेय यज्ञ करने का फल प्राप्त होता है। इससे पूर्व जन्म के पाप के कारण जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

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pavitra ekadashi vrat falls on 3 august 2017

प्राचीन काल में एक नगर में राजा महिजीत राज करते थे। निःसंतान होने के कारण राजा बहुत दुःखी थे। मंत्रियों से राजा का दुःख देखा नहीं गया और वह लोमश ऋषि के पास गये। ऋषि से राजा के निःसंतान होने का कारण और उपाय पूछा। महाज्ञानी लोमश ऋषि ने बताया कि पूर्व जन्म में राजा को एकादशी के दिन भूखा प्यासा रहना पड़ा। पानी की तलाश में एक सरोवर पर पहुंचे तो एक गाय वहां पानी पीने आ गई।

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pavitra ekadashi vrat falls on 3 august 2017
- फोटो : google

राजा ने गाय को भगा दिया और स्वयं पानी पीकर प्यास बुझाई। इससे अनजाने में एकादशी का व्रत हो गया और गाय के भगान के कारण राजा को निःसंतान रहना पड़ रहा है। लोमश ऋषि ने मंत्रियों से कहा कि अगर आप लोग चाहते हैं कि राजा को पुत्र की प्राप्ति हो तो श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत रखें और द्वादशी के दिन अपना व्रत राजा को दान कर दें। मंत्रियों ने ऋषि के बताए विधि के अनुसार व्रत किया और व्रत का दान कर दिया। इससे राजा को पुत्र की प्राप्ति हुई। इस कारण पवित्रा एकादशी को पुत्रदा एकादशी भी कहा जाता है।

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