Mahashivratri Puja Vidhi: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो देवों के देव महादेव की पूजा को समर्पित है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है। पुराणों के मुताबिक फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से शिव संग पार्वती की आराधना की जाती है और शिवालयों में जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने की परंपरा है।
Mahashivratri 2025: दुर्लभ संयोग में महाशिवरात्रि आज, महादेव की विशेष कृपा पाने के लिए इस विधि से करें पूजा
Mahashivratri Puja Vidhi: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जो देवों के देव महादेव की पूजा को समर्पित है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है।
चार प्रहर की पूजा का समय
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 06:29 से रात 09 बजकर 34 मिनट तक
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 09:34 से 27 फरवरी सुबह 12 बजकर 39 मिनट तक
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को रात 12:39 से सुबह 03 बजकर 45 मिनट तक
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 27 फरवरी को सुबह 03:45 से 06 बजकर 50 मिनट तक
पूजा विधि
- महाशिवरात्रि पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थान पर गंगाजल से छिड़काव करें।
- अब पूजा की सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें।
- अब दूध, दही, घी और शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- इसके बाद महादेव को चंदन लगाएं।
- फिर पान, सुपारी, अक्षत अर्पित करें, यह शुभ होता है।
- शिव जी को फूल माला अर्पित करें।
- अब उन्हें बिल्वपत्र, धतूरा, नारियल चढ़ाएं।
- देवी पार्वती को श्रृंगार अर्पित करें।
- अब उन्हें फूलों की माला पहनाएं।
- महादेव के समक्ष आटे का चौमुखी दीपक जला लें।
- अब महादेव को तिल, गेहूं, भांग, कपूर, भस्म, आक के फूल भी अर्पित कर दें।
- इसके बाद भोलेनाथ और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें।
- शिव चालीसा और महाशिवरात्रि की कथा का पाठ करें।
- अंत में शिव-परिवार की आरती करें।
महाशिवरात्रि पर करें ये उपाय
- महाशिवरात्रि पर एक चांदी का लोटा लेकर उसमें साफ पानी भरें और उसमें एक चांदी का सिक्का डाल दें। अब 11 सफेद फूल लें और जल में मिला दें। इसके बाद इसे शिवलिंग पर चढ़ा दें। मान्यता है कि ऐसा करने पर आर्थिक समस्याओं का निवारण होता है।
- धार्मिक मानयताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर जरुरतमंदों को अन्न का दान करें। इससे भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं जिससे साधक के सभी पापों का नाश होता है।
- ज्योतिषियों की मानें तो महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर केसर का दूध चढ़ाएं। ऐसा करने पर वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और रिश्तों में विश्वास बढ़ता है।
भगवान शिव की आरती
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।