Mahashivratri 2022: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 1 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती की विवाह की रात्री है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन रुद्राभिषेक करने से भक्त की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भांग-धतूरा, दूध, चंदन, भस्म जैसी कई वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। लेकिन अक्सर अनजाने में हम कुछ ऐसी वस्तुएं अर्पित कर देते हैं जिसके कारण भगवान शंकर कुपित हो सकते हैं। शिवपुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव की आराधना करते समय कौन सी वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित नहीं करनी चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं वो वस्तुएं-
{"_id":"62075b9705ec15442240b067","slug":"maha-shivratri-2022-do-not-offer-these-five-things-to-lord-shiva-on-the-day-of-mahashivratri-you-may-not-get-the-desired-result-of-worship","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Maha Shivratri 2022: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को भूलकर भी न अर्पित न करें ये पांच चीजें, नहीं मिलेगा पूजा का फल","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Maha Shivratri 2022: महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को भूलकर भी न अर्पित न करें ये पांच चीजें, नहीं मिलेगा पूजा का फल
Sat, 12 Feb 2022 12:59 PM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Sat, 12 Feb 2022 12:59 PM IST
विज्ञापन
Maha Shivratri 2022: हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 1 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएगी।
- फोटो : istock
Maha Shivratri 2022: शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना वर्जित है।
- फोटो : istock
हल्दी
शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व माना जाता है और हल्दी स्त्रियों से संबंधित मानी जाती है। यही कारण है कि शिवलिंग पर हल्दी चढ़ाना वर्जित है। इससे भगवान शिव क्रोधित हो सकते हैं।
Maha Shivratri 2022: भगवान शिव को भूलकर भी सिंदूर अर्पित न करें।
- फोटो : istock
सिंदूर
भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है और सिंदूर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती हैं। इसलिए भगवान शिव पर सिंदूर चढ़ाना अशुभ माना जाता है। इसके स्थान पर भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।
भगवान शिव को संहार का देवता माना जाता है और सिंदूर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती हैं। इसलिए भगवान शिव पर सिंदूर चढ़ाना अशुभ माना जाता है। इसके स्थान पर भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाना शुभ माना जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Maha Shivratri 2022: वृंदा ने शिव जी को श्राप दिया के उनके पूजन में तुलसी का उपयोग वर्जित रहेगा।
- फोटो : istock
तुलसी दल
भगवान शिव को तुलसी भी अर्पित नहीं की जाती है।शिवपुराण के अनुसार जालंधर नाम के राक्षस को अपनी पत्नी वृंदा की पवित्रता और विष्णु जी द्वारा दिए गए कवच के कारण अमरता का वरदान मिला था। अमर होने के इस वरदान के कारण वह लोगों पर अत्याचार करने लगा, तो शिव जी ने उसका वध कर दिया। इससे नाराज वृंदा ने शिव जी को श्राप दिया के उनके पूजन में तुलसी का उपयोग वर्जित रहेगा।
भगवान शिव को तुलसी भी अर्पित नहीं की जाती है।शिवपुराण के अनुसार जालंधर नाम के राक्षस को अपनी पत्नी वृंदा की पवित्रता और विष्णु जी द्वारा दिए गए कवच के कारण अमरता का वरदान मिला था। अमर होने के इस वरदान के कारण वह लोगों पर अत्याचार करने लगा, तो शिव जी ने उसका वध कर दिया। इससे नाराज वृंदा ने शिव जी को श्राप दिया के उनके पूजन में तुलसी का उपयोग वर्जित रहेगा।
विज्ञापन
Maha Shivratri 2022: शंखचूड़ नामक असुर का वाढ करने का कारण भगवान भोलेनाथ में शंख का उपयोग निषेध है।
- फोटो : istock
शंख से जल चढ़ाना
शिव-पुराण में उल्लेख है कि शिव जी ने शंखचूड़ नाम के एक दैत्य का वध किया था इसलिए शिव जी को शंख से जल चढ़ाने पर या पूजा में शंख का उपयोग करने से वे नाराज हो सकते हैं।
शिव-पुराण में उल्लेख है कि शिव जी ने शंखचूड़ नाम के एक दैत्य का वध किया था इसलिए शिव जी को शंख से जल चढ़ाने पर या पूजा में शंख का उपयोग करने से वे नाराज हो सकते हैं।