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शुरू हो गया आदि का महीना, जानें कब और कैसे मनाया जाता है आदि पेरुक्कु

Mon, 05 Aug 2019 09:53 AM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत राय Updated Mon, 05 Aug 2019 09:53 AM IST
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knwo about the importance of aadi perukku festival
- फोटो : social media

भारत के हर क्षेत्र में अलग-अलग त्योहार मनाया जाता है। इसी सिलसिले में आदि पेरुक्कु दक्षिण भारत के मुख्य त्योहारों में से एक है। ये खास त्योहार उफनती नदियों से आए पानी को लेकर यह मनाया जाता है। यह त्योहार कावेरी नदी के प्रति श्रद्धाभाव और आभार जताने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस त्योहार पर अधिकांश परिवार खाना बनाकर आसपास के झील या तालाब के किनारे पिकनिक मनाना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं इस खास त्योहार को किस तरह लोग मनाते हैं। 

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- फोटो : social media

इस त्योहार को तालाब के किनारे मनाने के पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान खुश होते हैं। ऐसा करने से लोग खुद को पर्यावरण के करीब महसूस करते हैं। महिलाएं और बच्चे शाम को इन जलाशयों के पास दीप जलाकर आभार प्रकट करते हैं। आदि पेरुक्कु उत्सव तिरुचरापल्ली के अलावा कावेरी नदी के किनारे बसे इरोड, तंजावुर और सलेम में लोग धूमधाम से मनाते हैं। 

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- फोटो : social media

आदि पेरुक्कु एक हिन्दू तमिल महोत्सव है। जो तमिल महीने आदि के 18वें दिन मनाया जाता है। यह एक मॉनसून आधारित उत्सव है, जो मुख्य रूप से खेती से जुड़े लोग मनाते हैं। ये त्योहार कावेरी नदी या किसी झील के किनारे मनाया जाता है। इस दौरान मॉनसून के कारण नदी में पानी काफी होता है, जो कि स्थानीय लोगों के लिए सुख-समृद्धि लेकर आता है। 

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- फोटो : social media

यह त्योहार किसानों और उन लोगों द्वारा विशेष तौर पर मनाया जाता है, जिनका जीवन पानी पर निर्भर है। इस खास मौके पर महिलाएं देवी पचई अम्मा की पूजा-अर्चना करती हैं। 

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- फोटो : social media

तमिलनाडु के कई मंदिरों में यह उत्सव मनाया जाता है। पूजा के दौरान लोग मां कावेरी और बारिश के लिए वरुणा देवी की पूजा करते हैं। ताकि बारिश अच्छी हो और उससे फसल की अच्छी पैदावार हो। 

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