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Jagannath Rath Yatra 2020: अनूठी रसोई से लेकर शिखर की ध्वजा तक, जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य

Tue, 23 Jun 2020 12:28 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 23 Jun 2020 12:28 PM IST
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Jagannath Rath Yatra 2020 know unknown facts about puri temple
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा
Jagannath Rath Yatra 2020: पुरी के भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आरंभ हो चुकी है। उड़ीसा राज्य में स्थित पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर वैष्णव सम्प्रदाय का एक प्रसिद्द हिन्दू मंदिर है जो जगत के स्वामी भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। जगन्नाथ पुरी को धरती का वैकुंठ कहा गया है। इस स्थान को शाकक्षेत्र, नीलांचल और नीलगिरि भी कहते हैं। भारत के चार धामों में से एक है जगन्नाथ पुरी। कहते हैं कि यहाँ बाकी के तीनों धाम जाने के बाद अंत में आना चाहिए। जगत के नाथ यहाँ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। तीनों ही देव प्रतिमाएं काष्ठ की बनी हुई हैं। हर बारह वर्ष बाद इन मूर्तियों को बदले जाने का विधान है, पवित्र वृक्ष की लकड़ियों से पुनः मूर्तियों की प्रतिकृति बना कर फिर से उन्हें एक बड़े आयोजन के साथ प्रतिष्ठित किया जाता है।
Jagannath Rath Yatra 2020 know unknown facts about puri temple
कृष्णानगर के नादिया में रथ यात्रा उत्सव से पहले भगवान जगन्नाथ की मिट्टी की मूर्तियों को सजाती कलाकार। - फोटो : PTI
वेदों के अनुसार भगवान हलधर ऋग्वेद स्वरुप हैं,श्री हरि (नृसिंह) सामदेव स्वरुप हैं,सुभद्रा देवी यजुर्वेद की मूर्ति हैं और सुदर्शन चक्र अथर्ववेद का स्वरुप माना गया है। वैसे तो भारत के बहुत सारे मंदिरों के साथ आश्चर्य जुड़े हुए हैं लेकिन जगन्नाथ मंदिर से जुड़े आश्चर्य बहुत ही अद्भुत हैं। जगन्नाथ पुरी जितना खूबसूरत है उतना ही रहस्यमयी भी।समुद्र के किनारे बना यह मंदिर अपने अंदर कई दैवीय चमत्कारों को समेटे हुए है जहाँ विज्ञान के नियम भी यहाँ काम नहीं करते हैं। भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर पर जाकर कोई भी इन आश्चर्यों को देख सकता है लेकिन बहुत प्रयासों के बाद भी अभी तक इन रहस्यों से पर्दा नहीं उठा है इनमें से कुछ इस प्रकार हैं।

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Jagannath Rath Yatra

हवा के खिलाफ लहराती है शिखर की ध्वजा
मंदिर के शिखर पर स्थित ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा क्यों होता है यह एक रहस्य ही बना हुआ है। एक और अद्भुत बात इस ध्वज से जुड़ी है वह यह कि इसे हर रोज बदला जाता है और बदलने वाला भी उल्टा चढ़कर ध्वजा तक पंहुचता है।

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सुदर्शन चक्र दिखता है सीधा
मंदिर के शिखर पर ही अष्टधातु निर्मित सुदर्शन चक्र है। इस चक्र को नील चक्र भी कहा जाता है और मान्यता के अनुसार इसके दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसकी खास बात यह है कि यदि आप किसी भी कोने से खड़े होकर किसी भी दिशा से इस चक्र को देखेंगें तो वह हमेशा आपके सामने बिल्कुल सीधा ही नज़र आएगा।

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अनूठी है यहां की रसोई
श्री जगन्नाथ के मंदिर में स्थित रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है। इसमें एक साथ 500 के करीब रसोइये और 300 के आस-पास सहयोगी भगवान के प्रसाद को तैयार करते हैं। मंदिर में प्रवेश से पहले दाईं तरफ आनंद बाज़ार और बाईं तरफ महा प्रभु श्री जगन्नाथ मंदिर की पवित्र और विशाल रसोई है। इस रसोई में प्रसाद पकाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं। यह प्रसाद मिटटी के बर्तनों में लकड़ी पर ही पकाया जाता है,पर आश्चर्य की बात यह है कि इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान सबसे पहले पकता है फिर नीचे की तरफ से एक के बाद एक प्रसाद पकता जाता है। मंदिर के इस प्रसाद को रोज़ाना करीब 25000  से ज़्यादा भक्त ग्रहण करते हैं।विशेष बात तो यह है कि यहां न तो प्रसाद बचता है और न ही कभी कम पड़ता है।

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