Jagannath Rath Yatra 2020: अनूठी रसोई से लेकर शिखर की ध्वजा तक, जानिए जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्य
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हवा के खिलाफ लहराती है शिखर की ध्वजा
मंदिर के शिखर पर स्थित ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है। ऐसा क्यों होता है यह एक रहस्य ही बना हुआ है। एक और अद्भुत बात इस ध्वज से जुड़ी है वह यह कि इसे हर रोज बदला जाता है और बदलने वाला भी उल्टा चढ़कर ध्वजा तक पंहुचता है।
सुदर्शन चक्र दिखता है सीधा
मंदिर के शिखर पर ही अष्टधातु निर्मित सुदर्शन चक्र है। इस चक्र को नील चक्र भी कहा जाता है और मान्यता के अनुसार इसके दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसकी खास बात यह है कि यदि आप किसी भी कोने से खड़े होकर किसी भी दिशा से इस चक्र को देखेंगें तो वह हमेशा आपके सामने बिल्कुल सीधा ही नज़र आएगा।
अनूठी है यहां की रसोई
श्री जगन्नाथ के मंदिर में स्थित रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है। इसमें एक साथ 500 के करीब रसोइये और 300 के आस-पास सहयोगी भगवान के प्रसाद को तैयार करते हैं। मंदिर में प्रवेश से पहले दाईं तरफ आनंद बाज़ार और बाईं तरफ महा प्रभु श्री जगन्नाथ मंदिर की पवित्र और विशाल रसोई है। इस रसोई में प्रसाद पकाने के लिए सात बर्तन एक दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं। यह प्रसाद मिटटी के बर्तनों में लकड़ी पर ही पकाया जाता है,पर आश्चर्य की बात यह है कि इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान सबसे पहले पकता है फिर नीचे की तरफ से एक के बाद एक प्रसाद पकता जाता है। मंदिर के इस प्रसाद को रोज़ाना करीब 25000 से ज़्यादा भक्त ग्रहण करते हैं।विशेष बात तो यह है कि यहां न तो प्रसाद बचता है और न ही कभी कम पड़ता है।