वसंत पंचमी का पर्व आज बड़ी धूमधाम के साथ देशभर में मनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सभी लोग अपने मित्रों और रिश्तेदारों को Happy Saraswati Puja 2020 की बधाइयां भी दे रहे हैं। यह पर्व 30 जनवरी को भी मनाया जाएगा। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आज सूर्योदय के बाद लगी है जो कल सूर्योदय के बाद भी व्याप्त रहेगी। कल सूर्योदय व्यापिनी के कारण वसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा। यहां शुभकामना भरे संदेशों के साथ आप वसंत पंचमी की पौराणिक कथा को पढ़ सकते हैं।
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Happy Saraswati Puja 2020: दोस्तों और रिश्तेदारों को भेजें वसंत पंचमी की शुभकामनाएं
Thu, 30 Jan 2020 06:28 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Thu, 30 Jan 2020 06:28 AM IST
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Happy Vasant Panchami 2020
- फोटो : अमर उजाला
Happy Vasant Panchami 2020
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी का दिन अबूझ मुहर्त के तौर पर जाना जाता है और यही कारण है कि नए काम की शुरुआत के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है। वसंत पंचमी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना भी शुभ होता है। इतना ही नहीं, इस दिन पीले पकवान बनाना भी काफी अच्छा माना जाता है।
Happy Vasant Panchami 2020
- फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी से जुड़ी पौराणिक कथा
हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।
हिंदु पौराणिक कथाओं में प्रचलित एक कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने संसार की रचना की। उन्होंने पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मनुष्य बनाए, लेकिन उन्हें लगा कि उनकी रचना में कुछ कमी रह गई। इसीलिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा। जैसे वीणा बजी ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज़ में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। वह दिन वसंत पंचमी का था। इसी वजह से हर साल वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का जन्मदिन मनाया जाने लगा और उनकी पूजा की जाने लगी।
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Happy Vasant Panchami 2020
- फोटो : अमर उजाला
कैसे करें मां सरस्वती की पूजा
सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें।
इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें।
पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं।
बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें।
इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।
सुबह-सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें।
इसके बाद पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें।
पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें और बच्चों को भी पूजा स्थल पर बैठाएं।
बच्चों को तोहफे में पुस्तक दें।
इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।