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Hanuman Janmotsav 2025: घर पर करें हनुमान जी की पूजा इस आसान विधि से, मिलेगी समृद्धि और कष्टों से मुक्ति

Sat, 12 Apr 2025 06:11 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 12 Apr 2025 06:11 AM IST
सार

Hanuman Puja at Home:  चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती मनाई जा रही है। चूंकि हनुमान जी को अमर माना जाता है इसीलिए इस दिन को जयंती की जगह जन्मोत्सव बोलना ज्यादा उचित है। इस दिन भक्तगण भगवान हनुमान के जन्मोत्सव को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाते हैं।

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Hanuman Janmotsav 2025 Date Puja Vidhi and Spiritual Significance at Home
हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : adobe stock

Ghar Par Kaise Karein Hanuman Puja: आज चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती मनाई जा रही है। चूंकि हनुमान जी को अमर माना जाता है इसीलिए इस दिन को जयंती की जगह जन्मोत्सव बोलना ज्यादा उचित है। इस दिन भक्तगण भगवान हनुमान के जन्मोत्सव को श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाते हैं। यह दिन न केवल आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि  जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला माना जाता है।

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कहते हैं कि इस दिन सच्चे मन से की गई हनुमान पूजा हर प्रकार की बाधा, भय और दुख को दूर कर सकती है। जो लोग घर पर पूजा करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक विशेष अवसर है जब वे अपने निवास में ही प्रभु का आशीर्वाद पा सकते हैं। हनुमान जी को रामभक्त, संकटमोचन और अजर-अमर देवता माना जाता है, जिनकी आराधना से मनुष्य को अद्भुत बल, बुद्धि और भक्ति की प्राप्ति होती है। आइए जानें कि हनुमान जयंती के दिन कैसे करें घर पर पूजा और पाएं सुख-समृद्धि का आशीर्वाद।

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Hanuman Janmotsav 2025 Date Puja Vidhi and Spiritual Significance at Home
हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : Adobe

हनुमान जयंती 2025 कब है?
पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल 2025 को तड़के 3:20 बजे हो रही है, और इसका समापन 13 अप्रैल को सुबह 5:52 बजे होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, हनुमान जयंती का पर्व 12 अप्रैल को ही मनाना शुभ रहेगा। यही वह दिन है जब भक्त भगवान हनुमान के जन्म का उत्सव मनाते हैं, उनका चोला चढ़ाते हैं, हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और संकटमोचन से अपने जीवन के दुख-दर्द दूर करने की प्रार्थना करते हैं। इस दिन किया गया पूजा-पाठ, व्रत और हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। इसलिए इस शुभ दिन को श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाना अत्यंत लाभकारी रहेगा।

Hanuman Janmotsav 2025 Date Puja Vidhi and Spiritual Significance at Home
हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : adobe stock

शुभ मुहूर्त में पूजा कब करें?

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:30 से 5:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:55 से 12:45 बजे तक
संध्या पूजा मुहूर्त: शाम 5:30 से 7:00 बजे तक

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Hanuman Janmotsav 2025 Date Puja Vidhi and Spiritual Significance at Home
हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : adobe stock

हनुमान जंयती की पूजा विधि

  • हनुमान जन्मोत्सव के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और लाल या नारंगी कपड़ा बिछाएं।
  • उस पर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें, साथ में भगवान राम और माता सीता की तस्वीर भी रखें।
  • सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर रखें, साथ ही लाल फूल, माला, जनेऊ, दीपक, धूप, कपूर, नारियल, गुड़-चना, लड्डू, केला, पंचामृत और तुलसी पत्ते रखें।
  • गंगाजल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें और मन में अपनी मनोकामना दोहराएं।
  • सबसे पहले भगवान राम और माता सीता की पूजा करें, फिर हनुमान जी को गंगाजल से स्नान कराएं।
  • सिंदूर और चमेली के तेल से हनुमान जी को चोला चढ़ाएं, नए वस्त्र और जनेऊ पहनाएं।
  • लाल फूल और माला अर्पित करें, फिर गुड़-चना, लड्डू, फल और पंचामृत का भोग लगाएं। 
  • दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • अंत में आरती करें और हुई भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।
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हनुमान जन्मोत्सव 2025 - फोटो : अमर उजाला

हनुमान जन्मोत्सव (जयंती) का महत्व
हनुमान जन्मोत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, शक्ति और समर्पण का उत्सव है। यह दिन उस क्षण की याद दिलाता है जब भगवान शिव के रुद्रावतार रूप में हनुमान जी ने धरती पर जन्म लिया था। माना जाता है कि इस दिन प्रभु हनुमान के जन्म के साथ ही संसार में भक्ति, बल और बुद्धि का संचार हुआ।
हनुमान जी को रामभक्ति का प्रतीक, संकटमोचन और कर्मयोगी माना जाता है। उनकी पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में साहस, आत्मबल व सकारात्मकता का संचार होता है। कहते हैं कि जो सच्चे मन से उनका नाम लेता है, उसकी सारी बाधाएं दूर हो जाती हैं। हनुमान जयंती का दिन भक्तों के लिए आत्मचिंतन, साधना और सेवा का अवसर होता है। यह दिन हमें सिखाता है कि विनम्रता में भी महानता है, और सच्ची भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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