गीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है साथ ही इस दिन मोक्षका एकादशी को उपवास भी रखा जाता है। इस बार यह 30 नवंबर को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन का मोह भंग करने के लिए मोक्ष प्रदायिनी भगवत गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
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गीता के आविर्भाव की कहानी महाभारत में मिलती है। दरअसल जब कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरव और पांडव आपस में युद्ध कर रहे थे तब अर्जुन के मन में यह ख्याल आया कि मै जिसके खिलाफ युद्ध कर रहा हूं ये सब मेरे भाई और गुरु ही तो है। तब अर्जुन ने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अवसादग्रस्त होकर हथियार त्याग दिये। ऐसे में उनके सारथी बने भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कर्तव्य विमुख होने बचाने के लिये गीता का उपदेश दिया।
अपने उपदेश में भगवान श्री कृष्ण ने आत्मा-परमात्मा से लेकर धर्म-कर्म से जुड़ी अर्जुन की हर शंका का निदान किया। भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुआ यह संवाद ही श्रीमद्भगवद गीता का उपदेश है। इस उपदेश के दौरान ही भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को अपना विराट रूप दिखलाकर जीवन की वास्तविकता से उनका साक्षात्कार करवाते हैं। तब से लेकर अब तक गीता के इस उपदेश की सार्थकता बनी हुई है।
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को जीवन का सार बताया गया। इस ग्रंथ में कुल मिलाकर18 अध्याय हैं और 700 छंद हैं। ऐसी मान्यता है कि आज से लगभग सात हजार वर्ष पूर्व कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भागवत गीता सुनाई थी। वह दिन रविवार था और तिथि एकादशी थी। गीता को अर्जुन के अलावा धृतराष्ट्र एवं संजय ने भी सुना था। अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान भगवान सूर्यदेव को मिला था।