आज कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, दिवाली के दिन लक्ष्मी गणेश पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। दिवाली पूजन में वास्तु शास्त्र बहुत महत्वपूर्ण हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिवाली के दिन पूजा के लिए मां लक्ष्मी की चौकी विधि-विधान से सजाई जाती है। साथ ही लक्ष्मी पूजन के दौरान दिशा स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, जो भी भक्त मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विधिवत व्यवस्था करते हैं, उनकी पूजा जल्दी सफल होती है। पूजा के लिए सही दिशा का चयन पूजा को सार्थक व परिवार में सुख शांति प्रदान करता है। दिवाली पूजन में लक्ष्मी पूजन स्थान और सही दिशा का भी महत्व होता है। इसलिए साधक को लक्ष्मी पूजन के समय पूजन स्थान की सही दिशा का ज्ञान होना चाहिए। आइए जानते हैं कि वास्तु शास्त्र के अनुसार लक्ष्मी पूजन का सही स्थान और दिशा क्या है जिससे आज आप पूजन के दौरान सही दिशा में पूजा कर सकें।
Diwali 2021: आज है दिवाली, इन वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर इस दिशा में बनाएं मां लक्ष्मी का पूजन स्थान, जरूर मिलेगी धन संपत्ति
लक्ष्मी पूजा का स्थान ईशान कोण
मत्स्य पुराण के अनुसार धन-वैभव और सौभाग्य प्राप्ति के लिए दीपावली की रात्रि को लक्ष्मीपूजन के लिए श्रेष्ठ माना गया है। श्रीमहालक्ष्मी पूजन, मंत्रजाप, पाठ तंत्रादि साधन के लिए प्रदोष, निशीथ, महानिशीथ काल व साधनाकाल अनुष्ठानानुसार अलग-अलग महत्व रखते हैं। पूजा के लिए पूजास्थल तैयार करते समय दिशाओं का भी उचित समन्वय रखना जरूरी है। पूजा का स्थान ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) की ओर बनाना शुभ है। इस दिशा के स्वामी भगवान शिव हैं, जो ज्ञान एवं विद्या के अधिष्ठाता हैं। पूजास्थान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर भी बनाया जा सकता है। देवी-देवताओं की मूर्तियां तथा चित्र पूर्व-उत्तर दीवार पर इस प्रकार रखें कि उनका मुख दक्षिण या पश्चिम दिशा की तरफ रहे।
कलश स्थापना का स्थान
पूजा कलश पूर्व दिशा में उत्तरी छोर के समीप रखा जाए तथा हवनकुंड या यज्ञवेदी का स्थान पूजास्थल के आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) की ओर रहना चाहिए। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का आगे का भाग दिखाई दे और इसे कलश पर रखें। यह कलश वरुणदेव का प्रतीक है।
लक्ष्मी पूजा का दीप स्थान
लक्ष्मीजी की पूजा के दीपक उत्तर दिशा की ओर रखे जाते हैं। पूजा, साधना आदि के लिए उत्तर या पूर्व या पूर्व-उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना उत्तम है। तंत्रसाधना के लिए पश्चिम दिशा की तरफ मुख रखा जाता है।
लक्ष्मी व गणेश की मूर्ति की मुख दिशा
लक्ष्मीजी, गणेशजी के दाहिनी ओर स्थापित करें। दिवाली पूजन के लिए चौकी पर लक्ष्मी व गणेश जी की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे।