Dev Diwali 2024: कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि पर 'देव दिवाली' मनाई जाती है। यह दीपों का त्योहार है, जो भगवान शिव को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था। इस उपलक्ष्य पर देवताओं ने स्वर्ग में दीप जलाकर देव दिवाली मनाई थी। भारत में इस त्योहार को मुख्य रूप से काशी में गंगा नदी के तट पर मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
कहते हैं कि देव दिवाली पर महादेव की विधि अनुसार पूजा करने से साधक को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं। साथ ही मन से भी डर भय भी समाप्त होते हैं। इस वर्ष 15 नवंबर 2024 को देव दिवाली का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि भी होती हैं। ऐसे में स्नान दान से जुड़े कार्य करने पर पितरों की कृपा भी प्राप्त होती हैं।
पंचांग के अनुसार इस साल देव दिवाली के दिन व्यतीपात योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह 07 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसके बाद परिध योग शुरू हो जाएगा। इस दिन भरणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में कुछ खास उपाय करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। आइए इन उपायों के बारे में जानते हैं।
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Dev Diwali 2024
- फोटो : freepik
देव दिवाली पर करें ये उपाय
- देव दिवाली पर एक आटे और एक मिट्टी का दीया जला लें। फिर इसमें 7 लौंग रख दें। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है, और दरिद्रता दूर होती है।
- इस दौरान तुलसी के पौधे की 11 पत्तियां लें। फिर आप उसे एक साफ धागे में पिरोकर उसकी माना बना लें। इसके बाद इस माला को भगवान विष्णु को अर्पित करें। इससे जीवन में चल रही सभी समस्याएं समाप्त होती हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देव दिवाली के दिन घर की साफ-सफाई करें। इस दौरान मुख्य द्वार की स्वच्छता का खास ध्यान रखना चाहिए। फिर तोरण लगाएं और रंगोली बनाएं। इसके बाद आप घर में गंगाजल का छिड़काव भी करें। शाम को मुख्य द्वार और घर में घी के दीप जलाकर मां लक्ष्मी की पूजा करें। इससे आर्थिक समस्याओं का निवारण होता है।
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- माना जाता है कि देव दिवाली के दिन भगवान सत्यनारायण की कथा पढ़नी चाहिए। इससे मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं।
- शास्त्रों में देव दिवाली के दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन गंगा स्नान के बाद दीपदान करने से देवताओं और पितरों की कृपा प्राप्त होती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।