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Chhath puja 2021: छठ पर्व आरंभ, क्यों मनाया जाता है छठ पर्व, जानिए इन प्रचलित लोकथाओं के जरिए

Mon, 08 Nov 2021 09:03 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 08 Nov 2021 09:03 AM IST
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Chhath puja 2021 date time Chhath festival begins, why Chhath festival is celebrated know through these popular folklores lokkatha
Chhath puja 2021: जानिए छठ महापर्व को इन प्रचलित लोकथाओं के जरिए - फोटो : istock

छठ पूजा का आज से आरंभ हो चुका है। छठ पूजा लोकास्था का महापर्व है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है। मूलतः सूर्य षष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा गया है। यह पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में। चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जानेवाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है। यह पर्व नहाय-खाए से आरंभ होता है और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस पर्व का समापन  हो जाता है यानि  छठ पूजा चार दिवसीय उत्सव है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते। इस लोकआस्था के पर्व से बहुत सी लोकथाएं जुड़ी हैं, आइए जानते हैं क्या हैं ये लोक कथाएं- 

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छठ पूजा 2021

श्रीराम और माता सीता ने की थी सूर्यदेव की उपासना 

पौराणिक लोककथा के अनुसार लंका विजय के बाद राम राज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी को भगवान राम और माता सीता ने उपवास किया था और सूर्यदेव की आराधना की। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुनः अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था।

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छठ पूजा 2021

द्रौपदी द्वारा भी की गई थी सूर्य पूजा 
एक अन्य कथा के अनुसार पांडवों की पत्नी द्रौपदी द्वारा भी सूर्य की पूजा करने का उल्लेख है। वे अपने परिजनों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना और लंबी उम्र के लिए नियमित सूर्य पूजा करती थीं।

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छठ पूजा - फोटो : amar ujala

सूर्य पुत्र कर्ण ने की सूर्य देव की पूजा 

एक अन्य मान्यता के अनुसार छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य देव की पूजा शुरू की। कर्ण भगवान सूर्य का परम भक्त था। वह प्रतिदिन घंटों कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देता था। सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बना था। आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही पद्धति प्रचलित है।

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छठ पूजा 2021

राजा प्रियव्रत ने की छठी मैया की पूजा 

इस कथा का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण में भी मिलता है। प्रथम मनु स्वायम्भुव के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी। इस वजह से वे दुःखी रहते थे। महर्षि कश्यप ने राजा से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करने को कहा। महर्षि की आज्ञा अनुसार राजा ने यज्ञ कराया। इसके बाद महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया लेकिन दुर्भाग्य से वह शिशु मृत पैदा हुआ। इस बात से राजा और अन्य परिजन बेहद दुःखी थे। तभी आकाश से एक विमान उतरा जिसमें माता षष्ठी विराजमान थीं। जब राजा ने उनसे प्रार्थना कि, तब उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा कि- मैं ब्रह्मा की मानस पुत्री षष्ठी देवी हूं। मैं विश्व के सभी बालकों की रक्षा करती हूं और निःसंतानों को संतान प्राप्ति का वरदान देती हूं।”

इसके बाद देवी ने मृत शिशु को आशीष देते हुए हाथ लगाया, जिससे वह जीवित हो गया। देवी की इस कृपा से राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने षष्ठी देवी की आराधना की। ऐसी मान्यता है कि इसके बाद ही धीरे-धीरे हर ओर इस पूजा का प्रसार हो गया।

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