बदलती लाइफ स्टाइल का असर प्रजनन क्षमता पर भी हुआ है। पोषणयुक्त खान-पान का अभाव, ठीक से नींद ना होना, काम का बोझ और लगातार बढ़ता तनाव प्रजनन से जुड़ी समस्याओं की भी एक बड़ी वजह है। प्रजनन की समस्या स्त्री या पुरुष दोनों को हो सकती है। प्रजनन से जुड़ी समस्या से न सिर्फ आपका दाम्पत्य जीवन प्रभावित होता है बल्कि आपका पारिवारिक व सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है। निःसंतान दम्पतियों को समाज में अलग दृष्टि से देखा जाता है। खासतौर से हमारे देश में महिलाएं अलग तरह का दुख उठाती हैं।
जानिए आईवीएफ तकनीक के बारे में, कैसे हासिल कर सकते हैं संतान सुख
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निःसंतान दंपती अपने दुख को दूर करने के लिए कई तरह के अंधविश्वासों का भी शिकार होते हैं। अक्सर लोग अपना कीमती समय और लाखों रुपए इस समस्या से निजात पाने के लिए धार्मिक पाखंडियों के ऊपर खर्च कर देते हैं लेकिन समस्या का उपाय नहीं मिल पाता। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि संतान ना होने की समस्या का हल आज विज्ञान के पास उपलब्ध है। विज्ञान आजकल बांझपन व अन्य प्रजनन संबंधित दिक्कतों को नष्ट करने के क्षेत्र में तेजी से कार्यरत है। इसी का परिणाम है आईवीएफ तकनीक यानी की इन विट्रो फर्टिलाइजेशन तकनीक।
इस प्रक्रिया के बाद निषेचित (फर्टिलाइज) एग को महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है। इस प्रकार एग को फर्टिलाइज कराने में गर्भ-नलिकाओं, जिनके माध्यम से सामान्य रूप में एग्स व स्पर्म का सम्पर्क नहीं होता है, की जरूरत ही नहीं पड़ती और फर्टिलाइज एग महिला के गर्भाशय में पहुंच जाता है।
बता दें कि इस तकनीक का प्रयोग खासतौर पर तब करते हैं जब महिला की गर्भ नलिकाएं बंद होती है अथवा महिला में एग्स न बन रहे हों। पुरुष में शुक्राणुओं की संख्या कम होने पर भी इस तकनीक का प्रयोग करते हैं। परिवार में आनुवांशिक बीमारी होने पर बच्चे को इस बीमारी से बचाने के लिए भी आईवीएफ का प्रयोग किया जाता है।