आज जेल से छूटे संजय दत्त बड़े अभिनेता हैं। साथ ही उनकी खुद की जिंदगी भी किसी फिल्म से कम नहीं है। उनकी जिंदगी में बेहद उतार-चढ़ाव हैं। उनको 1993 के मुंबई बम विस्फोट मामले में मिली पांच की सजा पूरी करके वो रिहा हुए हैं। ये पहली बार नहीं है जब संजय जेल गए। उनकी जिंदगी के बारे में हम आपको बता रहे हैं।
ड्रग्स, हथियार, जेल, किसी फिल्म जैसी है संजय दत्त की जिंदगी
संजय दत्त के पिता हिन्दू और मां मुसलमान थी, दोनो अपने जमाने के सुपरस्टार। वो नर्गिस और सुनील दत्त जैसे सितारों के घर पैदा हुए। तो अभिनय उनके खून में होना ही था। उनका लालन-पालन बड़े अच्छे से हुआ। फिल्मों में भी किसी युवराज की तरह उनका स्वागत हुआ।
ड्रग्स, हथियार, जेल, किसी फिल्म जैसी है संजय दत्त की जिंदगी
1981 में संजय दत्त की पहली फिल्म रॉकी और फिर विधाता (1982) सुपरहिट रही। उनके करियर की शुरूआत शानदार रही। इस दौरान ही संजय ड्रग्स की चपेट में आ गए। तब पिता सुनील दत्त उन्हें मुश्किल दौर से उबारा था और तीन साल बाद 1985 में संजय ने फिल्म जान की बाजी से पहली वापसी की थी।
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पहली फिल्म की सफलता के बाद लड़खड़ा गए संजय दत्त के लिए सुनील दत्त ने दिन-रात मेहनत की । कई नशामुक्ति केन्द्रों में रहने के बाद संजय दत्त इस स्थिति से उबरे।। इसके बाद वह 1990 के शुरुआती वर्षों तक लगातार सफल रहे और नाम, इनाम दस हजार, इलाका से लेकर सड़क, साजन, खलनायक जैसी फिल्में दीं।
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मगर 1993 के मुंबई बम विस्फोटों के बाद आर्म्स एक्ट में गिरफ्तारी से उनका करिअर चार साल ठहरा रहा। तब लगा कि अब शायद ही संजय दत्त वापसी कर पाएंगे। संजय दत्त ने शानदार वापसी की। फिल्मों में भी उनकी निजी जिंदगी की 'खलनायक' की छवि को खूब भुनाया गया।