लखनऊ का गौरव माने जाने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय (लविवि) ने सोमवार को अपनी स्थापना के सौवें साल में प्रवेश कर लिया। पिछले 99 साल में लविवि कई बदलावों का गवाह बना। मूल रूप से एक अंग्रेज गवर्नर की याद में कैनिंग कॉलेज के रूप में इसकी शुरुआत हुई, पर आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल भी यहां से फूंका गया। डॉ. बीरबल साहनी जैसे वैज्ञानिक यहां के शिक्षक रहे तो डॉ. शंकर दयाल शर्मा जैसे राजनीतिज्ञ भी यहीं से निकले।
लखनऊ विश्वविद्यालय: 100 साल का स्वर्णिम इतिहास, कैनिंग कॉलेज से लविवि तक ऐसा रहा सफर
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लविवि से पुराने यहां के कॉलेज
लखनऊ विश्वविद्यालय की तरह यहां के कॉलेजों का भी गौरवशाली इतिहास रहा है। लविवि की शुरुआत 1921 में हुई थी। जबकि इससे सहयुक्त कई कॉलेजों की शुरुआत इससे पहले ही हो चुकी थी। विवि से सहयुक्त क्रिश्चियन कॉलेज 157 साल का हो चुका है। 1862 में इसकी शुरुआत हुई थी। इसी तरह आईटी कॉलेज की स्थापना 1870 में, आर्ट्स कॉलेज की शुरुआत 1911 में और श्री जय नारायण कॉलेज 1917 में हुई थी। इसके अलावा शिया पीजी कॉलेज का इतिहास भी लविवि से पुराना है।
लविवि का टैगोर पुस्तकालय इस समय देश के प्रतिष्ठित पुस्तकालयों में हैं। यहां करीब पांच लाख किताबें हैं। इस पुस्तकालय का नक्शा अपने समय के मशहूर आर्किटेक्ट ग्रिफिन ने तैयार किया। उनकी मृत्यु के बाद नर्लीकर ने इसे पूरा किया।
रवींद्रनाथ टैगोर लविवि की स्थापना के बाद कई बार यहां आए। उनकी मृत्यु होने के बाद लविवि के केंद्रीय पुस्तकालय का नाम उनके नाम पर कर दिया। पुस्तकालय के वर्तमान भवन की नींव वर्ष 1937 में रखी गई थी और 1940 में इस भवन का उद्घाटन किया गया।
बेनेट जो बन गया मालवीय हॉल
लविवि का मालवीय सभागार आजादी से पहले बेनेट हॉल के नाम से जाना जाता था। आजादी के बाद विवि में अंग्रेजों के नाम पर बने भवनों का नाम बदला गया। इसके बाद इसे मालवीय सभागार के नाम से जाना जाता है। शुरुआत में इस सभागार के भीतर अंग्रेजी शासकों और विद्वानों की तस्वीरें लगी हुई थीं।
वर्ष 1990 के बाद उन तस्वीरों को भारतीय विद्वान तथा महापुरुषों की तस्वीरों से बदल दिया गया। उस समय इसका जीर्णोद्धार भी किया गया। रुड़की स्थित सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियरों की देखरेख में यह काम हुआ। इस हॉल में गांधीजी, सुभाषचंद्र बोस, सरोजनी नायडू, नेहरूजी समेत देश-विदेश के राजनेता तथा विद्वानों ने भाषण दिए हैं।
लविवि की स्थापना के अगले साल वर्ष 1922 में छात्रसंघ की स्थापना हो गई थी। इसका भवन वर्ष 1940 में बनकर तैयार हुआ। छात्रसंघ यूनियन का भी स्वर्णिम इतिहास है। महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, सरोजनी नायडू, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महापुरुषों ने लविवि छात्रसंघ का उद्घाटन किया। कई महापुरुषों ने छात्रसंघ की मानद सदस्यता भी ग्रहण की है। छात्रसंघ ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के साथ ही परिसर में सांस्कृतिक गतिविधियों का संचालन भी किया।
सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक संकट
लखनऊ विश्वविद्यालय को इस समय सरकार से अनुदान फ्रीज होने के बाद सिर्फ 34 करोड़ रुपये का अनुदान ही मिलता है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केवल वेतन पर ही यहां हर साल 180 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। ऐसे में विवि की पहली चुनौती आर्थिक संकट ही है।
लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. नीरज जैन के अनुसार सरकार को विवि को आर्थिक सहायता देनी चाहिए। कम से कम यहां का वेतन तो सरकार को जरूर देना चाहिए। जिस तरह से निजी विवि और कॉलेज पैर पसार रहे हैं, ऐसे में उनसे मुकाबला सिर्फ तकनीक और सुविधाएं बढ़ाकर ही किया जा सकता है।