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इस जेल में मौत से भी बदतर है जिंदगी, मरा नहीं तो पागल हो जाता है कैदी

Wed, 22 Feb 2017 11:00 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 22 Feb 2017 11:00 AM IST
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photos shows brutal condition of priosners in port-au-prince's jail

कैरेबियन सागर में बसे देश हैती में इंसानों के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार होने का कड़वा सच सामने आया है। ये हालात यहां की राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस के जेल की हैं, जहां कैदी जीने की बजाय कथित तौर पर मौत की भीख मांगते हैं। 



देश की सबसे बड़ी जेल में कैदियों की जिंदगी नरक से भी बदतर है। यहां न तो कैदियों के लिए रहने की जगह है और न ही उन्हें खाना दिया जाता है। आलम ये है कि कैदियों को रोज यहां जिंदगी के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है। आईए आपको बताते हैं कि यहां कैदियों के साथ किस तरह की दरिंदगी बरती जा रही है....
 

photos shows brutal condition of priosners in port-au-prince's jail

दरअसल, इस जेल के हालातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिन्हें एक फोटोग्राफर ने शेयर किया है। इंसानियत को भी शर्मसार करने वाले इस जेल में न तो कैदियों को खाना मिलता है और न ही रहने के लिए जगह। पिछले महीने ही करीब 21 कैदी इन्हीं परेशानियों के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। 

photos shows brutal condition of priosners in port-au-prince's jail
haiti jail

चौंका देने वाली बात है कि यहां 20 कैदियों की जगह 100 एक साथ एक सेल में रहते हैं। इतना ही नहीं जब कैदी रात को यहां सोते हैं तो उनके कंधे आपस में टकराते रहते हैं और उन्हें हिलने की जगह भी नहीं मिलती। इस जेल से निकल चुके कई कैदियों ने बताया कि यहां रहने वाला कैदी अगर मर भी जाए तो ठीक है, लेकिन वो नहीं मरा तो उसका पागल होना तय होता है।

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photos shows brutal condition of priosners in port-au-prince's jail

हैरान करने वाली बात है कि जेल अधिकारी हालात न बिगड़ जाए इसलिए यहां कैदियों के सेल को 22 घंटों तक नहीं खोलते। कैदियों को फ्रैश होने के लिए प्लास्टिक बैग्स की मदद लेनी पड़ती है। 

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photos shows brutal condition of priosners in port-au-prince's jail

हर समय खाने की दिक्कत यहां की एक मूलभूल समस्या बन गई है। भले ही जेल प्रशासन की ओर से कैदियों को खाने का प्रबंध किया जाता हो, लेकिन उन्हें दूसरे स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। कैदी या तो अपने परिजनों से खाने का इंतजाम करते हैं या जेल के अधिकारियों को पैसे देकर खाना खरीदते हैं।

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