चंबल के बीहड़ से यूपी की राजनीति में दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने जो कर दिखाया, वो न उनसे पहले किसी ने किया और न ही आगे कोई कर सकता है। देखिए, इनके इस कारनामों को...
उस समय फूलन 15 साल की थी जब कुछ दबंगों ने घर में ही उसके मां-बाप के सामने उसके साथ गैंगरेप किया। बावजूद फूलन के तेवर कमजोर नहीं पड़े। उसके बाद गांव के दबंगों ने एक दस्यु गैंग को कहकर फूलन का अपहरण करवा दिया। बस यहीं से शुरू हुआ फूलन के डकैत बनने की कहानी ।
14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने कानपुर देहात के बेहमही गांव में एक ही जाति के 20 लोगो को गोली मार कर उन सब की हत्या कर दी थी, जिसे प्रदेश का सबसे बड़ा नरसंहार कहा जाता है। जिसकी बेहमई गाँव में रहने वाले लोगों के दिलों में दहशत आज भी है। फूलन देवी का कहना था उन्होंने ये हत्याएं बदला लेने के लिए की थीं।
इसी बेहमई कांड के बाद फूलन देवी भारत और दूसरे देशों में चर्चा में आ गई थीं। फूलन की जिंदगी में बहुत सारे उतार-चढ़ाव रहे। इतने किस्से थे उसकी छोटी सी जिंदगी में कि फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने उस पर फिल्म बना डाली। बैंडिट क्वीन (1994) ये फिल्म बहुत हिट हुई। बैंडिट क्वीन को सात फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले थे।
बाद में फूलन देवी राजनीति के मैदान में उतर गई और खूब नाम कमाया। फूलन सांसद चुनी गर्ईं लेकिन कुछ ही दिन के बाद उनकी हत्या हो गयी। हत्यारे को सज़ा भी हो गयी लेकिन बेहमई कांड का फैसला अभी तक नहीं आया। हालांकि बीहड़ में आज भी फूलन देवी के रूप में पूजी जाती हैं। फूलन गरीबों की मसीहा मानी जाती थीं।