बॉलीवुड की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार के हत्यारे अब्दुल रऊफ को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में स्थित सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया है। मीडिया खबरों के अनुसार मोदी सरकार अब्दुल के प्रत्यर्पण के लिए बांग्लादेश से बातचीत कर रही है।
बता दें कि रऊफ को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का खास माना जाता है। रऊफ को दाऊद मर्चेंट के नाम से भी पुकारा जाता है। आईए बताते हैं कैसेट किंग के नाम से मशहूर गुलशन कुमार ने कैसे कामयाबी की सीढ़ी चढ़ी और कैसे उनकी बेरहमी से हत्या की गई...
पढ़ें, जूस की दुकान से कैसेट किंग बने गुलशन कुमार की कैसे हुई थी हत्या
दिल्ली की पंजाबी फैमिली में जन्मे गुलशन कुमार छोटी उम्र से ही बड़े सपने देखते थे। गुलशन ने जूस की दुकान लगाकर पैसे कमाना शुरू किया था। गुलशन को बचपन से ही म्यूजिक का शौक था, इसलिए वे ओरिजनल गानों को खुद की आवाज में रिकॉर्ड करके उन्हें कम दाम में बेचते थे। गुलशन को जब दिल्ली में तरक्की के आसार नहीं दिखे तब उन्होंने मुंबई जाने का फैसला लिया।
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मुंबई में जब गुलशन कामयाब होने लगे तो 12 अगस्त 1997 का दिन उनकी जिंदगी का आखिरी दिन साबित हुआ। सूत्रों के अनुसार गुलशन की हत्या करने के लिए शार्प शूटर्स लाए गए थे। 12 अगस्त को मुंबई के अंधेरी पश्चिम उपनगर जीत नगर में जीतेश्वर महादेव मंदिर के बाहर गुलशन पर बदमाशों ने ताबतोड़ गोलियां चलाईं।
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हत्या के आरोप में अब्दुल रऊफ को गिरफ्तार किया गया, हालांकि तब उनकी हत्या के लिए संगीत निर्देशक नदीम को भी जिम्मेदार माना जा रहा था। साल 2001 में रऊफ ने अपना गुनाह कबूल लिया और अप्रैल 2002 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इस बीच रऊफ जेल से फरार हो गया और वह बांग्लादेश भाग गया।
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बताते चलें कि रऊफ बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल पर बाहर आया था, लेकिन 2009 में वह देश छोड़कर भाग निकला। रऊफ बांग्लादेश में फर्जी पासपोर्ट का बिजनेस करने लगा लेकिन पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। लंबी सजा भुगतने के बाद रऊफ अब जेल से छूटा है, लेकिन उम्मीद लगाई जा रही है कि रऊफ को भारत जरूर लाया जाएगा।