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एक MA पास युवती, नौकरी छोड़कर अपनाई खेती, आज सैकड़ों को दे रहीं रोजगार
दिव्या रावत
Updated Fri, 01 Dec 2017 11:14 AM IST
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Divya Rawat
- फोटो : Divya Rawat
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नोएडा के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा और इसके बाद इग्नू से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री लेने के बाद मैंने यही सीखा-पहले अपना काम खुद करो, फिर दूसरों को सीख दो। मेरे पिता फौज में थे। वर्तमान में मैं देहरादून के मोथरोवाला क्षेत्र में रहती हूं, पर मेरा पुराना घर चमोली के पास कंडारा गांव में है।
10 जिलों में मशरूम उत्पादन की 53 यूनिट
खेती और उत्पादन
- फोटो : फाइल फोटो
मेरा घर ही मशरूम उत्पादन की प्रयोगशाला है। मैं सीखने वालों के लिए किसी संस्थान सरीखे अपने घर में उनको न सिर्फ प्रेक्टिकल ज्ञान देती हूं, बल्कि थ्योरी भी समझाती हूं। मेरा सफर आज एक फूड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शक्ल ले चुका है, जिसका सालाना लाखों रुपये का टर्नओवर है। मैं अब तक उत्तराखंड के 10 जिलों में मशरूम उत्पादन की 53 यूनिट लगा चुकी हूं, जिससे हजारों लोग जुड़े हैं। मुझे खुशी होती है कि मेरी कंपनी में काम करने वाले महिला और युवाओं को अपने घर में ही रोजगार मुहैया हुआ है। उनकी जिंदगी में साफ तौर पर सुखद बदलाव देखा जा सकता हैं।
मुझे अपने काम से लोगों को जोड़ने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ा। मैंने अपने काम की सफलता से उनके सामने उदाहरण प्रस्तुत किया, जिस वजह से लोग खुद-ब-खुद मुझसे जुड़ते चले गए। मेरे काम को उत्तराखंड सरकार ने भी सराहा है। इसके अलावा मुझे राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इन सब के बावजूद मैं अपनी जड़ों से जुड़ी हूं। सड़क पर खुद खड़ी होकर मशरूम बेचना हो या मशरूम के लिए खाद तैयार करने के लिए भूसे के ढेर में उतरना, मैं ये सारे काम खुद करती हूं।
इसके अलावा मैं सप्ताह में एक दिन अपनी गाड़ी में मशरूम की ट्रे रखकर शहर के अलग-अलग इलाकों में रोड शो कर लोगों को मशरूम के बारे में बताती हूं। मैं मानती हूं कि इच्छाशक्ति हो, तो हम घर बैठे स्वरोजगार से अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। मेरा काम तो एक बेहतर शुरुआत भर है। मेरा सपना उत्तराखंड को 'मशरूम स्टेट' बनाना है।
मुझे अपने काम से लोगों को जोड़ने के लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ा। मैंने अपने काम की सफलता से उनके सामने उदाहरण प्रस्तुत किया, जिस वजह से लोग खुद-ब-खुद मुझसे जुड़ते चले गए। मेरे काम को उत्तराखंड सरकार ने भी सराहा है। इसके अलावा मुझे राष्ट्रपति पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। इन सब के बावजूद मैं अपनी जड़ों से जुड़ी हूं। सड़क पर खुद खड़ी होकर मशरूम बेचना हो या मशरूम के लिए खाद तैयार करने के लिए भूसे के ढेर में उतरना, मैं ये सारे काम खुद करती हूं।
इसके अलावा मैं सप्ताह में एक दिन अपनी गाड़ी में मशरूम की ट्रे रखकर शहर के अलग-अलग इलाकों में रोड शो कर लोगों को मशरूम के बारे में बताती हूं। मैं मानती हूं कि इच्छाशक्ति हो, तो हम घर बैठे स्वरोजगार से अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। मेरा काम तो एक बेहतर शुरुआत भर है। मेरा सपना उत्तराखंड को 'मशरूम स्टेट' बनाना है।