{"_id":"64e24f7b45bbc984310be8c5","slug":"the-doors-of-shri-nagchandreshwar-temple-open-at-12-o-clock-will-be-closed-again-for-one-year-after-24-hours-2023-08-20","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Nag Panchami 2023: अब तक ढाई लाख ने किए नागचंद्रेश्वर के दर्शन, रात 12 बजे फिर एक साल के लिए बंद हो जाएंगे पट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nag Panchami 2023: अब तक ढाई लाख ने किए नागचंद्रेश्वर के दर्शन, रात 12 बजे फिर एक साल के लिए बंद हो जाएंगे पट
Mon, 21 Aug 2023 04:34 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 21 Aug 2023 04:34 PM IST
सार
उज्जैन महाकाल मंदिर परिसर में स्थित श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट ठीक 12 बजते ही खोल दिए गए। साल में एक दिन के लिए खुलने वाले इस मंदिर के दर्शन के लिए लाखों लोग पहुंचते हैं। सोमवार का दिन होने से भक्तों की संख्या बढ़ेगी। सोमवार दोपहर तक लगभग सात लाख लोगों ने भगवान महाकाल और नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए।
विज्ञापन
दोपहर तक सात लाख लोगों ने किए महाकाल मंदिर और नागचंद्रेश्वर के दर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर के शिखर पर स्थित भगवान नागचंदेश्वर मंदिर के कपाट नागपंचमी पर एक साल बाद रविवार रात 12 बजे श्रद्धालुओ के लिए फिर से खोल दिए गए। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीतगिरी महाराज के सान्निध्य में अधिकारियो ने भगवान नागचंदेश्वर की पूजा अर्चना की। इसके बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज सोमवार रात 12 बजे तक जारी रहेगा।
नागचंद्रेश्वर के पहले दर्शन
- फोटो : सोशल मीडिया
श्री महाकालेश्वर मंदिर के द्वितीय तल पर श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर के पट साल में एक बार 24 घंटे सिर्फ नागपंचमी के दिन खोले जाते हैं, जिन्हें रविवार रात 12 बजे विशेष पूजा-अर्चना के साथ आम भक्तों के लिए खोल दिया गया। इसके पहले भगवान श्री नागचन्द्रेश्वर की त्रिकाल पूजा हुई। जिसमें श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत श्री विनितगिरि जी महाराज एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति कलेक्टर एवं अध्यक्ष कुमार पुरुषोत्तम द्वारा प्रथम पूजन व अभिषेक किया गया। इसके बाद मंदिर में आम श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से आए भक्तों ने भी भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के दर्शन का लाभ लिया।
अधिकारियों ने किया शासकीय पूजन
श्री महाकालेश्वर मंदिर के द्वितीय तल पर श्री नागचन्द्रेश्वर भगवान की सोमवार दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत श्री विनितगिरी जी महाराज द्वारा पूजन किया गया। पूजन में संभागायुक्त डॉ. संजय गोयल, मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम, नगर पालिक निगम आयुक्त रोशन कुमार सिंह, मंदिर प्रशासक संदीप कुमार सोनी, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा आदि ने भी नागचंद्रेश्वर भगवान का पूजन किया। इस दौरान ध्वज का पूजन कर शिखर पर नया ध्वज भी बदला गया।
अधिकारियों ने किया शासकीय पूजन
श्री महाकालेश्वर मंदिर के द्वितीय तल पर श्री नागचन्द्रेश्वर भगवान की सोमवार दोपहर 12 बजे श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत श्री विनितगिरी जी महाराज द्वारा पूजन किया गया। पूजन में संभागायुक्त डॉ. संजय गोयल, मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम, नगर पालिक निगम आयुक्त रोशन कुमार सिंह, मंदिर प्रशासक संदीप कुमार सोनी, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा आदि ने भी नागचंद्रेश्वर भगवान का पूजन किया। इस दौरान ध्वज का पूजन कर शिखर पर नया ध्वज भी बदला गया।
वर्ष में केवल एक बार खुलते हैं पट
- फोटो : अमर उजाला
रात 12 बजे होंगे आरती के बाद पट बंद, महाकाल के पुजारी शाम को करेंगे पूजन
रविवार रात से दर्शन का सिलसिला शुरू होगा जो सोमवार रात 12 बजे तक चलेगी। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आज सोमवार 21 अगस्त 2023 को ही श्री महाकालेश्वर भगवान की साथ आरती के पश्चात श्री नागचन्देश्वर जी की पूजन-आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी एवं पुरोहितों द्वारा की जाएगी। इसी दिन शाम को 7.30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर समिति की ओर महाकाल मंदिर के पुजारी नागराज की पूजा अर्चना करेंगे। आरती के समय दर्शनार्थियों का प्रवेश रोका जाएगा। सोमवार रात 10 बजे नागचंदेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए कतार में श्रद्धालुओं का खड़े होना बंद कर दिया जाएगा। रात 10 बजे तक जितने भक्त कतार में लगे हैं। सिर्फ उन्हें ही भगवान के दर्शन होगे। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वार फिर से पूजा अर्चना कर एक साल के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
प्रतिमा में कुछ यह है खास
श्री महाकाल मंदिर के गर्भगृह के ऊपर ओंकरेश्वर मंदिर और उसके भी शीर्ष पर श्री नागचन्द्रेश्वर का मंदिर प्रतिष्ठापित है। श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा स्थापित है, प्रतिमा में श्री नागचन्द्रेश्वर स्वयं अपने 7 फनों से सुशोभित हो रहे हैं। साथ में शिव-पार्वती के दोनों वाहन नंदी एवं सिंह भी विराजित हैं। मूर्ति में श्री गणेश की ललितासन मूर्ति, उमा के दांयी ओर कार्तिकेय की मूर्ति व ऊपर की ओर सूर्य-चन्द्रमां भी अंकित है। इस प्रकार श्री नागचन्द्रेश्वर की मूर्ति अपने आप में भव्य एवं कलात्मकता का उदाहरण है। भगवान के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं। कहते हैं कि यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। ऐसी मान्यता है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। महंत प्रकाशपुरी के अनुसार लाल बलुवाई पत्थर की इस मूर्ति में शिव-पार्वती शेषनाग पर बैठे हुए दृश्य होते हैं। उनके ऊपर छत्र रूप में नाग देवता का फन फैला हुआ है। इस मूर्ति के दर्शन के बाद भक्त मंदिर के दूसरे भाग में जगदेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं।
रविवार रात से दर्शन का सिलसिला शुरू होगा जो सोमवार रात 12 बजे तक चलेगी। महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा आज सोमवार 21 अगस्त 2023 को ही श्री महाकालेश्वर भगवान की साथ आरती के पश्चात श्री नागचन्देश्वर जी की पूजन-आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी एवं पुरोहितों द्वारा की जाएगी। इसी दिन शाम को 7.30 बजे भगवान महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर समिति की ओर महाकाल मंदिर के पुजारी नागराज की पूजा अर्चना करेंगे। आरती के समय दर्शनार्थियों का प्रवेश रोका जाएगा। सोमवार रात 10 बजे नागचंदेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए कतार में श्रद्धालुओं का खड़े होना बंद कर दिया जाएगा। रात 10 बजे तक जितने भक्त कतार में लगे हैं। सिर्फ उन्हें ही भगवान के दर्शन होगे। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वार फिर से पूजा अर्चना कर एक साल के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे।
प्रतिमा में कुछ यह है खास
श्री महाकाल मंदिर के गर्भगृह के ऊपर ओंकरेश्वर मंदिर और उसके भी शीर्ष पर श्री नागचन्द्रेश्वर का मंदिर प्रतिष्ठापित है। श्री नागचन्द्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा स्थापित है, प्रतिमा में श्री नागचन्द्रेश्वर स्वयं अपने 7 फनों से सुशोभित हो रहे हैं। साथ में शिव-पार्वती के दोनों वाहन नंदी एवं सिंह भी विराजित हैं। मूर्ति में श्री गणेश की ललितासन मूर्ति, उमा के दांयी ओर कार्तिकेय की मूर्ति व ऊपर की ओर सूर्य-चन्द्रमां भी अंकित है। इस प्रकार श्री नागचन्द्रेश्वर की मूर्ति अपने आप में भव्य एवं कलात्मकता का उदाहरण है। भगवान के गले और भुजाओं में भुजंग लिपटे हुए हैं। कहते हैं कि यह प्रतिमा नेपाल से यहां लाई गई थी। ऐसी मान्यता है कि उज्जैन के अलावा दुनिया में कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है। महंत प्रकाशपुरी के अनुसार लाल बलुवाई पत्थर की इस मूर्ति में शिव-पार्वती शेषनाग पर बैठे हुए दृश्य होते हैं। उनके ऊपर छत्र रूप में नाग देवता का फन फैला हुआ है। इस मूर्ति के दर्शन के बाद भक्त मंदिर के दूसरे भाग में जगदेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रबंधन ने भक्तों को दर्शन कराने उचित व्यवस्था की थी।
- फोटो : अमर उजाला
पहले रास्ता संकरा होने से मंदिर तक पहुंचने में लगती थी देर
नागचन्द्रेश्वर मंदिर करीब 60 फीट की ऊंचाई पर है। पूर्व के समय में मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती थी। कारण है कि मंदिर के दरवाजे बहुत ही छोटे होने के साथ सीढ़ियों का रास्ता भी संकरा है और झुक कर जाना पड़ता था, जिससे एक समय में एक ही दर्शनार्थी दर्शन कर सकता था। वहां पहुंचने का अन्य रास्ता भी नहीं था, लेकिन करीब दो दशकों से देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा अन्य दूसरा रास्ता लोहे की सीढ़ियों वाला निर्माण किया गया, ताकि अधिक दर्शनार्थी दर्शन लाभ ले सकें। इसके बाद मंदिर के स्ट्रक्चर की जांच के लिए आए केंद्रीय भवन अनुसंधान रूड़की के दल ने मंदिर से सटाकर लगे लोहे के चढ़ाव को हटाने के निर्देश दिए थे। जिससे मंदिर के मुख्य स्ट्रक्चर प्रभावित नहीं हो। इसके बाद 30 जून 22 को केंद्रीय भवन अनुसंधान रूड़की से अनुमति के बाद नया ब्रिज तैयार कर श्रद्धालुओ को दर्शन शुरू किए गए जिससे अब श्रद्धालुओं को आसानी से भगवान के दर्शन ही जाते हैं।
नागचन्द्रेश्वर मंदिर करीब 60 फीट की ऊंचाई पर है। पूर्व के समय में मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती थी। कारण है कि मंदिर के दरवाजे बहुत ही छोटे होने के साथ सीढ़ियों का रास्ता भी संकरा है और झुक कर जाना पड़ता था, जिससे एक समय में एक ही दर्शनार्थी दर्शन कर सकता था। वहां पहुंचने का अन्य रास्ता भी नहीं था, लेकिन करीब दो दशकों से देश के विभिन्न प्रांतों से आने वाले दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति द्वारा अन्य दूसरा रास्ता लोहे की सीढ़ियों वाला निर्माण किया गया, ताकि अधिक दर्शनार्थी दर्शन लाभ ले सकें। इसके बाद मंदिर के स्ट्रक्चर की जांच के लिए आए केंद्रीय भवन अनुसंधान रूड़की के दल ने मंदिर से सटाकर लगे लोहे के चढ़ाव को हटाने के निर्देश दिए थे। जिससे मंदिर के मुख्य स्ट्रक्चर प्रभावित नहीं हो। इसके बाद 30 जून 22 को केंद्रीय भवन अनुसंधान रूड़की से अनुमति के बाद नया ब्रिज तैयार कर श्रद्धालुओ को दर्शन शुरू किए गए जिससे अब श्रद्धालुओं को आसानी से भगवान के दर्शन ही जाते हैं।
