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नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह: आयुर्वेद के डॉक्टर ने बुलंद की गरीबों की आवाज, बदले में जनता ने बनाया सात बार विधायक
Fri, 29 Apr 2022 02:42 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 29 Apr 2022 02:42 PM IST
सार
नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह: आयुर्वेद के डॉक्टर ने बुलंद की गरीबों की आवाज, बदले में जनता ने बनाया सात बार विधायक
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डॉ. गोविंद सिंह, नेता प्रतिपक्ष
- फोटो : सोशल मीडिया
मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के पद से कमलनाथ के इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष चुना गया है। गोविंद सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार हैं। मध्य प्रदेश की सत्ता में वे 1990 से लगातार सक्रिय हैं। वर्तमान में वह भिंड की लहार विधानसभा से विधायक हैं। इस सीट पर उनका कब्जा 3 दशक से भी ज्यादा समय से है। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक जीवन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें।
गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष चुने जाने पर बधाई देते कमलनाथ।
- फोटो : सोशल मीडिया
छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे
गोविंद सिंह ने राजनीति की शिक्षा और आयुर्वेद की शिक्षा साथ-साथ ली। 1974-75 में उन्होंने छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय जबलपुर के छात्रसंघ के अध्यक्ष बने। विश्वविद्यालय छात्र संघ कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 1979 से 1982 तक लगातार वे सहकारी विपणन संस्था मर्यादित, लहार के अध्यक्ष चुने गए। दोबारा 1984-85 में वे फिर इस पद के लिए निर्वाचित हुए। गोविंद सिंह 1984 से 1986 तक जिला सहकारी भूमि विकास बैंक, भिंड के संचालक भी रह चुके हैं। वहीं, 1985 से 1987 तक नगरपालिका, परिषद लहार के अध्यक्ष पद पर पदस्थ रहे।
1980 में पहली बार जनता के लिए उठाई आवाज
आयुर्वेद की डिग्री लेने के बाद गोविंद सिंह ने लहार में अपना क्लिनिक ओपन किया था। 1980 के दौर में फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों को हटाने के लिए प्रशासन का दस्ता आया था, जो कि गरीबों की दुकानों को हटाने लगा। डॉ. गोविंद सिंह ने इसका विरोध करते हुए पहली बार जनता के हक में आवाज बुलंद की, प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करने पर उन्होंने पुलिस की लाठियां भी खाई। यही वह समय था जब उनकी तस्वीर लहार की जनता के दिल में बस गई।
7वीं बार जीती लहार विधानसभा
डॉ. गोविंद सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। 1985 में उन्होंने पहली बार जनता दल के टिकट पर विधायक का चुना लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जनता दल के टिकट पर ही 1990 में गोविंद सिंह ने दूसरी बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लहार विधानसभा सीट पर बीते 32 सालों से उनकी जीत का सिलसिला जारी है। यही वजह है कि लहार विधानसभा को कांग्रेस का अभेद गढ़ माना जाता है। 2018 में गोविंद सिंह कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से लगातार 6वीं बार विधायक बने हैं। वहीं, इस क्षेत्र से वे सातवीं बार विधायक बने हैं।
गोविंद सिंह ने राजनीति की शिक्षा और आयुर्वेद की शिक्षा साथ-साथ ली। 1974-75 में उन्होंने छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ा और शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय जबलपुर के छात्रसंघ के अध्यक्ष बने। विश्वविद्यालय छात्र संघ कार्यकारिणी के सदस्य रहे। 1979 से 1982 तक लगातार वे सहकारी विपणन संस्था मर्यादित, लहार के अध्यक्ष चुने गए। दोबारा 1984-85 में वे फिर इस पद के लिए निर्वाचित हुए। गोविंद सिंह 1984 से 1986 तक जिला सहकारी भूमि विकास बैंक, भिंड के संचालक भी रह चुके हैं। वहीं, 1985 से 1987 तक नगरपालिका, परिषद लहार के अध्यक्ष पद पर पदस्थ रहे।
1980 में पहली बार जनता के लिए उठाई आवाज
आयुर्वेद की डिग्री लेने के बाद गोविंद सिंह ने लहार में अपना क्लिनिक ओपन किया था। 1980 के दौर में फुटपाथ पर दुकान लगाने वालों को हटाने के लिए प्रशासन का दस्ता आया था, जो कि गरीबों की दुकानों को हटाने लगा। डॉ. गोविंद सिंह ने इसका विरोध करते हुए पहली बार जनता के हक में आवाज बुलंद की, प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करने पर उन्होंने पुलिस की लाठियां भी खाई। यही वह समय था जब उनकी तस्वीर लहार की जनता के दिल में बस गई।
7वीं बार जीती लहार विधानसभा
डॉ. गोविंद सिंह कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार हैं। 1985 में उन्होंने पहली बार जनता दल के टिकट पर विधायक का चुना लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जनता दल के टिकट पर ही 1990 में गोविंद सिंह ने दूसरी बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लहार विधानसभा सीट पर बीते 32 सालों से उनकी जीत का सिलसिला जारी है। यही वजह है कि लहार विधानसभा को कांग्रेस का अभेद गढ़ माना जाता है। 2018 में गोविंद सिंह कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से लगातार 6वीं बार विधायक बने हैं। वहीं, इस क्षेत्र से वे सातवीं बार विधायक बने हैं।
दिग्विजय सिंह के साथ गोविंद सिंह।
- फोटो : सोशल मीडिया
भिंड के स्ट्रॉन्ग मैन माने जाते हैं
लहार विधानसभा में गोविंद सिंह का दबदबा है। उनकी पहुंच घर-घर तक है। 1983 के दौर में जब गोविंद सिंह मार्केटिंग सोसायटी के अध्यक्ष थे, तो किसानों के घर-घर जाकर उनकी समस्याएं सुना करते थे और खाद-बीज पहुंचाया करते थे। वे हमेशा से जमीन से जुड़े रहे, जनता की समस्याओं को सुनते रहे और सुलझाते रहे। खुद एक किसान पुत्र होने के चलते वे क्षेत्र के किसानों की पीड़ा को भी भलीभांति जानते हैं। कांग्रेस सरकार के वक्त मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं का प्रमुखता से निराकरण किया।
कई बड़े पदों पर रह चुके हैं
डॉ. गोविंद सिंह कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कई बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राजनीति में उनका अनुभव तीन दशक से भी ज्यादा का है। उन्हें सरकार के कामकाज का अच्छा खासा अनुभव है। 1998 में उन्हें पहली बार गृह विभाग में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी। 2000 में वे सहकारिता विभाग में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। वहीं 2002 में उन्हें सहकारिता मंत्री बनाया गया था।
सिंधिया को देंगे टक्कर
डॉ. गोविंद सिंह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए चुनौती माना जा रहा है। कहा जाता है कि जब तक सिंधिया कांग्रेस में थे,ग्वालियर-चंबल अंचल में मिलने वाली जीत का सहरा हमेशा उनके सिर ही सजता रहा, हालांकि कांग्रेस को यहां सफलता दिलाने में गोविंद सिंह का भी अहम योगदान होता था, लेकिन उन्हें सिंधिया के रहते कभी श्रेय नहीं मिला। अब सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद गोविंद सिंह ग्वालियर चंबल क्षेत्र में चुनाव प्रबंधक की मुख्य भूमिका में रहेंगे।
2023 के चुनाव के लिहाज से है खास
गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का फायदा कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों में होगा। ग्वालियर चंबल अंचल में 34 विधानसभा सीटें आती हैं। इन सीटों को साधने में गोविंद सिंह खास भूमिका निभा सकते हैं। 2018 के चुनावों में कांग्रेस ने यहां 26 सीटें जीती थीं, लेकिन सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद और उपचुनावों के बाद कांग्रेस के खाते में सिर्फ सात सीटें आई। कांग्रेस 2023 के चुनावों के लिए एकजुट होकर ग्वालियर-चंबल में 2018 के परिणामों को फिर से हासिल करने की तैयारी में है, क्योंकि जो भी पार्टी यहां ज्यादा सीटें जीतेगी, उसके लिए सत्ता की राह आसान हो जाएगी।
बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं
डॉ. गोविंद सिंह नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद सुर्खियों में हैं, लेकिन वे मीडिया में हमेशा ही अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में बने रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा को 2023 के विधानसभा चुनावों के जीत की चुनौती देते हुए कहा था कि यदि भाजपा 2023 का चुनाव जीत जाएगी तो वह विधानसभा के सामने खड़े होकर ही अपना सर मुड़ा लेंगे। वे भाजपा के दिग्गज नेता प्रभात झा को भी लहार विधानसभा से चुनाव लड़ने की चुनौती देने के बाद सुर्खियों में थे।
कांग्रेस को एकजुट करेंगे
लंबे समय से कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आ रहीं थी, लेकिन सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब पार्टी को फिर से एकसूत्र में पिरोने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। डॉ. गोविंद सिंह जहां पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं, तो वहीं उनका कद पार्टी में काफी बड़ा है। सालों का अनुभव अब पार्टी में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। वहीं दिग्विजय, कमलनाथ और गोविंद सिंह की तिकड़ी विधानसभा चुनाव 2023 में पार्टी को जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
लहार विधानसभा में गोविंद सिंह का दबदबा है। उनकी पहुंच घर-घर तक है। 1983 के दौर में जब गोविंद सिंह मार्केटिंग सोसायटी के अध्यक्ष थे, तो किसानों के घर-घर जाकर उनकी समस्याएं सुना करते थे और खाद-बीज पहुंचाया करते थे। वे हमेशा से जमीन से जुड़े रहे, जनता की समस्याओं को सुनते रहे और सुलझाते रहे। खुद एक किसान पुत्र होने के चलते वे क्षेत्र के किसानों की पीड़ा को भी भलीभांति जानते हैं। कांग्रेस सरकार के वक्त मंत्री रहते हुए उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं का प्रमुखता से निराकरण किया।
कई बड़े पदों पर रह चुके हैं
डॉ. गोविंद सिंह कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कई बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। राजनीति में उनका अनुभव तीन दशक से भी ज्यादा का है। उन्हें सरकार के कामकाज का अच्छा खासा अनुभव है। 1998 में उन्हें पहली बार गृह विभाग में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी। 2000 में वे सहकारिता विभाग में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। वहीं 2002 में उन्हें सहकारिता मंत्री बनाया गया था।
सिंधिया को देंगे टक्कर
डॉ. गोविंद सिंह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए चुनौती माना जा रहा है। कहा जाता है कि जब तक सिंधिया कांग्रेस में थे,ग्वालियर-चंबल अंचल में मिलने वाली जीत का सहरा हमेशा उनके सिर ही सजता रहा, हालांकि कांग्रेस को यहां सफलता दिलाने में गोविंद सिंह का भी अहम योगदान होता था, लेकिन उन्हें सिंधिया के रहते कभी श्रेय नहीं मिला। अब सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद गोविंद सिंह ग्वालियर चंबल क्षेत्र में चुनाव प्रबंधक की मुख्य भूमिका में रहेंगे।
2023 के चुनाव के लिहाज से है खास
गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने का फायदा कांग्रेस को आगामी विधानसभा चुनावों में होगा। ग्वालियर चंबल अंचल में 34 विधानसभा सीटें आती हैं। इन सीटों को साधने में गोविंद सिंह खास भूमिका निभा सकते हैं। 2018 के चुनावों में कांग्रेस ने यहां 26 सीटें जीती थीं, लेकिन सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद और उपचुनावों के बाद कांग्रेस के खाते में सिर्फ सात सीटें आई। कांग्रेस 2023 के चुनावों के लिए एकजुट होकर ग्वालियर-चंबल में 2018 के परिणामों को फिर से हासिल करने की तैयारी में है, क्योंकि जो भी पार्टी यहां ज्यादा सीटें जीतेगी, उसके लिए सत्ता की राह आसान हो जाएगी।
बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं
डॉ. गोविंद सिंह नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद सुर्खियों में हैं, लेकिन वे मीडिया में हमेशा ही अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चा में बने रहते हैं। कुछ समय पहले उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए भाजपा को 2023 के विधानसभा चुनावों के जीत की चुनौती देते हुए कहा था कि यदि भाजपा 2023 का चुनाव जीत जाएगी तो वह विधानसभा के सामने खड़े होकर ही अपना सर मुड़ा लेंगे। वे भाजपा के दिग्गज नेता प्रभात झा को भी लहार विधानसभा से चुनाव लड़ने की चुनौती देने के बाद सुर्खियों में थे।
कांग्रेस को एकजुट करेंगे
लंबे समय से कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें आ रहीं थी, लेकिन सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने के बाद अब पार्टी को फिर से एकसूत्र में पिरोने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। डॉ. गोविंद सिंह जहां पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं, तो वहीं उनका कद पार्टी में काफी बड़ा है। सालों का अनुभव अब पार्टी में एक नई ऊर्जा का संचार करेगा। वहीं दिग्विजय, कमलनाथ और गोविंद सिंह की तिकड़ी विधानसभा चुनाव 2023 में पार्टी को जीत दिलाने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
