स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं ये चार आसान, जानें कैसे है करना?
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ताड़ासन
ताड़ासन में ताड़ा का अर्थ है- पर्वत। जैसे एक पर्वत बिना हिले-डुले अपनी दृढ़ता से खड़ा रहता है, वैसे ही यह आसन भी दृढ़ता से खड़े होने की शक्ति प्रदान करता है। ताड़ासन करने से एक्रगता बनी रहती है। यही नहीं, इस आसन को करने से श्वास सतुंलित रहती है। आसान को करने के लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाएं। ध्यान रहे कि इस आसान को करते समय कमर और गर्दन झुकनी नहीं चाहिए। अब अपने दोनों हाथों को ऊपर करें और धीरे-धीरे सांस लेते हुए शरीर को खीचें। इस आसान को आप 2-4 मिनट तक करें और फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।
वृक्षासन
वृक्षासन एक स्थिर पेड़ की नकल करता है। वृक्षासन आपको एकाग्रता बढ़ाने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त इस आसान को करने से पैर और पीठ मजबूत होते हैं। इस आसन को करने के लिए सीधे खड़े हो जाए। इसके बाद अपने दाहिने घुटनें को मोड़ते हुए अपने दाहिने पंजे को बाएं जंघा पर रखें लें। फिर अपने हाथों को ऊपर करके जोड़ लें। अपने बाएं पैर को सीधा रखें और सतुंलन बनाए रखें।
अधोमुख श्वानासन
अधोमुख श्वानासन एक संस्कृत शब्द है। यह तीन अक्षरों को मिलाकर बना है। अधो माने आगे, मुख का अर्थ चेहरा और श्वान का अर्थ कुत्ता और आसन का अर्थ मुद्रा है। इस आसान को अधोमुख श्वानासन इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस आसन को करते वक्त एकदम वैसी स्थिति बनती है , जैसे एक श्वान आगे की ओर झुककर अपने शरीर को खीचंता है। अधोमुख श्वानासन करने से पूरा शरीर तरोताजा़ रहता है। इस आसन को करने से मांसपेशियों में लचीलापन भी आता है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले खड़े हो जाएं और अब अपने दोनों हाथों को आगे करके नीचे जमीन की ओर ले जाएं। ध्यान रहे कि झुकते वक्त आपके घुटने बिल्कुल सीधे होने चाहिए। अब अपने हाथों की उंगलियों में बराबर का गैप रखे। अब अधोमुख श्वानासन को थोड़ा-सा धनुष के आकार में मोड़ लें और अपने एड़ियों को जमीन से ऊपर उठा लें।
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन को करने से लंबाई बढ़ती है। यह आसन पीठ दर्द से मुक्ति दिलाने में बेहद लाभदायक साबित होगा। करीब 2 हफ्तों तक इस आसन को करने से आपके पीठ का दर्द खत्म हो जाएगा। इस आसन को करने से वजन भी कम होता है। मोटे लोगो के लिए यह आसन बेहद फायदेमंद है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले अपने पैरों को चौड़ा करके सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद अपनी रीढ़ की हड्डी को मोड़ लें और अपने हाथ को नीचे रख लें। इसके बाद अपना दाहिना हाथ ऊपर कर लें। अब पने दाहिने हाथ की उंगली को देखें।