कोरोना के कारण बच्चों की पूरी जीवनचर्या बिगड़ चुकी है। माता-पिता के लिए उन्हें पढ़ने बैठाना बहुत मुश्किल काम हो चुका है क्योंकि इन ऑनलाइन क्लासेस में वे अपना पूरा ध्यान नहीं लगा पाते और शिक्षकों के लिए भी संभव नहीं होता कि इतने सारे बच्चों में वे किसी एक बच्चे पर अच्छे से ध्यान दे पाए। ऐसे में जब माता- पिता बच्चों को अलग से भी पढ़ने को बैठाते हैं तो उनकी नजरें इधर-उधर ही दौड़ रही होती हैं, वे माता -पिता के सवालों का ठीक से जवाब ही नहीं दे पाते हैं, जो कि वाकई चिंता का विषय है लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि हम आपको बता रहे हैं इसे समस्या का समाधान। अगली स्लाइड्स में बताए गए आसनों का अभ्यास करने से बच्चों में बढ़ जाएगी एकाग्रता।
यदि आपके बच्चों का भी पढ़ाई में नहीं लगता है मन तो करवाइए उन्हें ये योगासन, दिन-ब-दिन तेज होगा दिमाग
शीर्षासन
बच्चों के लिए बहुत जरूरी है कि वे रोजाना कम से कम 1 मिनट के लिए शीर्षासन करें। इससे बच्चों की याददाश्त के साथ ही आईक्यू लेवल भी बढ़ता है। ये आंखों की रोशनी के लिए भी अच्छा माना जाता है। हालांकि इसे करना इतना आसान नहीं है लेकिन यदि दीवार के सहारे इसे करने का प्रयास किया जो तो आसन को करने में सफलता तो मिलती ही है, साथ ही अच्छे परिणाम भी मिलते हैं।
सर्वांगासन
सर्वांगसन करने से बच्चे की एकाग्रता बढ़ती है। यदि पढ़ते समय बच्चे का ध्यान बार-बार भटक रहा है तो उसे रोज 2 से 3 मिनट के लिए सर्वांगास्न का अभ्यास करवाएं। सर्वांगासन करते समय बच्चे का ध्यान, उसकी नजरें पैरों पर होना चाहिए। इसे भी यदि करने में समस्या आ रही है तो आप अपने हाथों का सहारा दे सकते हैं या फिर दीवार की भी सहायता ले सकते हैं। हालांकि यह शीर्षासन की तुलना में आसान है।
सूर्य नमस्कार
बच्चे कोई अन्य आसन भले ही न करें लेकिन उनसे सूर्य नमस्कार तो जरूर करवाएं। सुबह उठकर यदि वे सूर्य नमस्कार के दो से तीन चक्र कर लेंगे तो पूरा दिन उनकी एकाग्रता बनी रहेगी और दिमाग भी फटाफट करेगा। सूर्य नमस्कार करने से पूरे शरीर का व्यायाम होता है। जिस वजह से बच्चों के शरीर में चुस्ती- फुर्ती बनी रहती है और दिनभर वे आलस्य मुक्त रहकर पढ़ाई में ध्यान लगा पाते हैं।
इस आसन को करने से पेड़ जैसी मुद्रा बनती है इसलिए इसे वृक्षासन कहा जाता है। इस आसन को करना बहुत आसान है। यह आसन दिमाग को एक जगह पर केंद्रित करने में सहायता तो करता ही है साथ ही शरीर को लचीला बनाता है। जिन बच्चों के थोड़ा बहुत चलने पर ही पैर दुखने लगते हैं उनके लिए तो यह आसन उपचार के समान है क्योंकि यह पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।