Karwa Chauth Traditions in India: करवा चौथ का त्योहार भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास और वैवाहिक रिश्ते की खूबसूरती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने से लेकर शाम को पूजा करने और चांद को अर्घ्य देने तक, इस पर्व से कई खास परंपराएं जुड़ी हुई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में करवा चौथ मनाने के तरीके में काफी अंतर देखने को मिलता है?
करवा चौथ 2026: पंजाब की सरगी से राजस्थान की पूजा तक, जानें करवा चौथ की अनोखी परंपराएं
Karwa Chauth Celebration Across India: भारत के अलग-अलग राज्यों में करवा चौथ कैसे मनाया जाता है? जानें पंजाब की सरगी, उत्तर प्रदेश की पूजा, राजस्थान की परंपराओं और बदलते समय के साथ इस त्योहार के नए रंग।
पंजाब में सरगी और सामूहिक पूजा की परंपरा
पंजाब में करवा चौथ बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यहां सुबह सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां, फेनियां और सूखे मेवे शामिल हो सकते हैं। कई परिवारों में मायके से भी कपड़े, मिठाइयां और दूसरी सौगातें भेजने की परंपरा है। शाम को महिलाएं एक साथ बैठकर पूजा करती हैं, व्रत कथा सुनती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। चांद निकलने पर अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है।
उत्तर प्रदेश में करवा माता की पूजा
उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में करवा चौथ की पूजा पारंपरिक विधि से की जाती है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा की तैयारी करती हैं और परिवार की परंपरा के अनुसार करवा माता या गौरा माता की पूजा करती हैं। शाम को व्रत कथा सुनने, करवा बदलने और चंद्रमा को जल अर्पित करने की रस्म निभाई जाती है। कुछ क्षेत्रों में पूजा के लिए दीवार या जमीन पर पारंपरिक आकृतियां भी बनाई जाती हैं।
राजस्थान में लोक परंपराओं का रंग
राजस्थान में करवा चौथ के दौरान पारंपरिक कपड़े, रंग-बिरंगी चूड़ियां, मेहंदी और सजावटी पूजा थालियों का खास आकर्षण रहता है। कई परिवारों में सास या अन्य बुजुर्ग महिलाओं को मिठाई, मठरी और दूसरी सौगातें देने की परंपरा है। स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा और कथा के तरीके में अंतर भी देखने को मिलता है।
हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पारिवारिक उत्सव
हरियाणा में सरगी, सामूहिक पूजा, व्रत कथा और चांद को अर्घ्य देने की परंपरा प्रचलित है। हिमाचल प्रदेश के कई परिवारों में भी महिलाएं पारंपरिक तरीके से व्रत रखती हैं और पूजा के दौरान एक-दूसरे के साथ समय बिताती हैं। हालांकि, रस्मों का स्वरूप परिवार और स्थानीय समुदाय के अनुसार अलग हो सकता है।