राजकपूर साहब ने एक गाने और 3 घंटे की फिल्म में 'अराउंड द वर्ल्ड इन 8 डॉलर्स' की सिफारिश की थी जिसे सबसे ज्यादा सीरियसली हिचहाइकिंग करने वालों ने ही लिया। हिचहाइकिंग यानी लिफ्ट ले लेकर यात्रा करना। हाल ही में आपने कई यूट्यूब चैनलों पर देशी-विदेशी कई लोगों को इसका उपयोग करते देखा होगा। इस प्रक्रिया में लिफ्ट लेने वाले से ज्यादा कई बार लिफ्ट देने वालों की हिचक सामने आती है। हिचहाइकिंग कितनी सुरक्षित है और कितनी नहीं, यह बात भी लम्बे समय से चर्चा का विषय बनी हुई है।
Hitchhiking: कम बजट में वर्ल्ड टूर, लेकिन रिस्क से नहीं है दूर
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नया नहीं है यह तरीका
हिचहाइकिंग कोई नई चीज नहीं है। यह सालों से चलन में है और सबसे ज्यादा इसका उपयोग फिल्मों में किया गया है। अंगूठा दिखा कर कार या अन्य वाहन में लिफ्ट लेते हीरो और हीरोइन और फिर हीरोइन को देखकर जल्दी वाहन रोकते चालक, बहुत आम दृश्य रहा है, जिसे बॉलीवुड-हॉलीवुड हर जगह अपनाया गया है। आम जीवन में भी लम्बे रास्तों पर, काँधे पर बैग टाँगे लोग इस तरीके से लिफ्ट मांगते दिख जाते हैं। कई व्लॉगर्स और ब्लॉगर्स तो इसी तरह से पूरी यात्रा करते दिख जायेंगे, चाहे देश हो या विदेश। 1950 के दौरान ऐसे ही एक हिचहाइकर का किस्सा लोगों के सामने आया था जब उसने करीब 2,500 मील का सफर हिचहाइकिंग के जरिये पूरा कर डाला था। इस बंदे का नाम था पीट कोल्टनाओ और यात्रा के दौरान उसके द्वारा लिखे पोस्टकार्ड बाद में ट्रांसपोर्ट के इतिहास का अनमोल हिस्सा बन गए।
बनने लगा खतरा
फिर एक समय ऐसा भी आया जब हिचहाइकिंग को लेकर लोगों के मन में शंका पनपने लगी। खासकर युवतियों और महिलाओं के मामले में। कुछ लोगों के साथ खराब अनुभव जुड़े और इनमें यात्रा करने वाले और लिफ्ट देने वाले दोनों ही तरह के लोग शामिल थे। लूटपाट, चोरी और छेड़छाड़ से लेकर रेप तक के केस सामने आये। धीरे धीरे हिचहाइकिंग का तरीका कम होने लगा। लोग अनजान लोगों को लिफ्ट देने में भी डरने लगे। एक कारण यह भी था कि ज्यादातर लोग खुद के वाहन भी खरीदने लगे। यात्राओं के लिए साधनों की सुविधा बढ़ने लगी और हिचहाइकिंग कम होने लगी लेकिन पिछले कुछ सालों से यह ट्रेंड फिर से बढ़ने लगा है।
कुछ बातों का ध्यान रखना है जरूरी
माउंटेन ट्रैकर नाम से यूट्यूब चैनल चलाने वाले वरुण वागीश देश-विदेश में कई जगह ट्रेवल कर चुके हैं और हिचहाइकिंग के जरिये ये कई बार यात्रा पूरी करते हैं। ऐसे देशों में भी जहाँ भाषा और परिवेश बहुत अलग होता है। ज्यादातर जगहों पर कोई दिक्कत नहीं आती लेकिन हां सावधानियां रखनी पड़ती हैं। ऐसी कुछ सावधानियां हैं-
समय का रखें ख्याल
यह सबसे खास बात है। ज्यादातर हिचहाइकर्स इस बात का ध्यान रखते हैं कि वे दिनभर में ही सफर पूरा करके रात को आराम की जगह ढूंढ लें। रात में सफर करना खतरनाक भी हो सकता है और थकाने वाला भी। इस समय रास्ते पहचानने में दिक्कत भी हो सकती है और आपको मदद के लिए भी कोई नहीं मिलता। इसलिए हमेशा दिन के उजाले में ही हिचहाइकिंग का विकल्प अपनाएं, चाहे आप पुरुष हों या महिला।
जगह भी रखती है मायने
हालाँकि कुछ देशों में हिचहाइकिंग बहुत सुरक्षित भी है और यहां आसानी से लोग लिफ्ट देते भी हैं लेकिन कुछ देशों में, कुछ जगहों पर इसे बैन भी किया गया है। इसलिए हिचहाइकिंग का ऑप्शन चुनने से पहले उस देश के बारे में पूरी जानकारी जरूर इकट्ठी करें। हर देश में कोई एक जगह या इलाका ऐसा होता है जहाँ लूटपाट जैसी घटनाएं अधिक होती हैं या जो सुनसान होता है। ऐसी किसी भी जगह के बारे में उस शहर में जाते ही जानकारी हासिल करें और उस जगह के स्थानीय प्रशासन व पुलिस के नंबर आदि अपडेट रखें।