हाल ही में अमेरिका के फ्लोरिडा के पार्कलैंड स्थित मारजोरी स्टोनमैन डगलस हाई स्कूल में एक छात्र द्वारा की गई गोलीबारी में छात्रों समेत करीब 17 लोग मारे गए। 19 वर्षीय आरोपी छात्र निकोलस क्रूज को अनुशासनात्मक कार्यवाई के तहत स्कूल से निकाल दिया गया था। इसी तरह पिछले वर्ष भारत में हरियाणा के गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में सात वर्षीय प्रद्युम्न की एक 11वीं के छात्र ने हत्या कर दी थी। इसके अलावा इस वर्ष लखनऊ के 'ब्राइटलैंड स्कूल' में कक्षा में ही एक छात्रा ने एक छात्र को चाकू मार दिया था।
इस तरह के मामले हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि आखिर बच्चों में इतनी हिंसात्मक प्रवृत्ति कहां से आ रही है, जिससे वे छोटी-छोटी बातों के लिए किसी को भी जान से मार सकते हैं। बच्चों में बढ़ रही इस हिंसक प्रवृत्ति के पीछे शिक्षा व्यवस्था और अभिभावक दोनों ही कहीं न कहीं दोषी हैं।
वर्तमान में बच्चों पर पढ़ाई को लेकर जो दबाव है, वह उनके ऊपर काफी हावी होता जा रहा है। आजकल के अधिकतर माता-पिता कामकाजी हैं। नौकरीपेशा होने के कारण उनके और बच्चों के बीच खाई बढ़ती जा रही है। वे एक-दूसरे की भावनाओं को नहीं समझते हैं। माता-पिता भी बच्चों से कभी यह नहीं पूछते कि उसे दिक्कत कहां आ रही है? बच्चे एकाकी होकर चिड़चिड़े और हिंसात्मक न हो जाएं, इसलिए प्रत्येक माता-पिता को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।