मोनिका अग्रवाल
Parenting Tips: आप जो करती हैं, बच्चा वही सीखता है। आप जैसे रहती हैं, बच्चा वही रहन-सहन अपनाता है। आप जो खाती हैं, बच्चा भी वैसा ही खाना सीख जाता है। घर में अलगाव जैसे वातावरण में बच्चे का स्वभाव भी जिद्दी हो सकता है, क्योंकि आपका घर ही बच्चे की परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पिंकी अपनी सहेली स्नेहा के घर पहुंची। वहां उसका 3 वर्षीय बेटा रोहन खिलौनों से खेल रहा था। पिंकी ने प्यार से रोहन से कहा, “क्या कर रहे हो, बेटा? हमें भी अपने साथ खिला लो।” इतना सुनते ही रोहन ने गुस्से से पिंकी की तरफ देखा और बोला, “यू स्टुपिड!” रोहन के ये शब्द सुनते ही पिंकी ने अचरज के साथ स्नेहा की तरफ देखा। स्नेहा ने मुस्कुराकर कहा, “पहली बार मिला है तुमसे, इसलिए ऐसा कह रहा है।” पिंकी को स्नेहा का इस तरह मुस्कुराना थोड़ा अखरा। उसने समझाते हुए कहा, “स्नेहा, बच्चे के व्यवहार के लिए उसके साथ माता-पिता का व्यवहार, घर का माहौल सब जिम्मेदार होते हैं। ये बातें आज अच्छी लग रही हैं, लेकिन जब बच्चा बड़ा होगा तो बुरी लगेंगी।”
आप अक्सर यह बात सुनती होंगी कि अपना घर तो अपना ही होता है और चाहे हम किसी भी महंगी या सस्ती जगह चले जाएं, लेकिन जो सुकून घर में मिलता है, वह कहीं नहीं मिलता। दरअसल, घर चाहे छोटा हो या बड़ा, परिवार के लिए काफी मायने रखता है। अगर घर में छोटे बच्चे हैं तो कैसे वातावरण में पल-बढ़ रहे हैं, घर के अंदर कैसा माहौल है और किस तरह से घर की साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है, इसका बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर बहुत प्रभाव पड़ता है।
2 of 8
Parenting Tips
- फोटो : pixabay
बच्चे के साथ जुड़ाव
रवि ने पत्नी प्रियंका के साथ मूवी जाने का प्रोग्राम बनाया और चार साल के बेटे वंश को पड़ोस में छोड़ कर जाने लगा। इस पर प्रियंका ने रवि से कहा, “अगर हम अपनी खुशी के लिए बच्चे को कुछ देर भी अकेला छोड़ेंगे तो वह तन्हा महसूस करेगा और ये बातें उसे हमारे साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने नहीं देंगी। अगर कहीं घूमने भी जाना है तो वंश के साथ ही चलेंगे।” सही भी है, क्योंकि बच्चों का पहला घर आप ही होते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चों को यह महसूस हो कि वे चाहे किसी भी स्थिति में हों, माता-पिता हमेशा उनका साथ देंगे। इससे बच्चों को घर में सुरक्षा की भावना महसूस होती है।
अच्छा व्यवहार
आप बच्चों के सामने अपनी जैसी छवि पेश करती हैं, उम्र भर वे आपको वैसा ही समझते हैं। अगर आप उनकी रोल मॉडल बनकर दिखाएंगी और उनके साथ हमेशा अच्छा व्यवहार करेंगी तो वे आपको हमेशा इज्जत और सम्मान देंगे। लेकिन अगर आप उन्हें इसी समय प्यार और समय नहीं दे पाएंगी तो वे आपको हमेशा नफरत की नजर से देखने लगेंगे।
3 of 8
पेरेंटिंग टिप्स
- फोटो : Istock
पहली सीख घर से
मधु अपनी ढाई वर्षीय बेटी के साथ खेल रही थी। बातों-बातों में उसने समझाया, “बड़ों के साथ हमेशा आदर से पेश आना चाहिए और उनके नाम के साथ जी लगाना चाहिए। इस पर मासूम-सी आवाज में आहना बोली, “मम्मी जी!” इतना सुनते ही मधु मुस्कुरा दी। असल में, बच्चे माता-पिता से ही सबसे पहले सीखते हैं, इसलिए कहा जाता है कि माता-पिता बच्चे के पहले शिक्षक होते हैं। अगर आपके बच्चे को स्वस्थ और दोस्ताना वातावरण मिलेगा तो वह चीजों को जल्दी से सीखना शुरू कर देगा और अच्छी बातें ज्यादा गंभीरता से सीख पाएगा।
छुपन-छुपाई क्यों नहीं
पीहू बार-बार अपनी मम्मी (मेघा) से मोबाइल देने की जिद कर रही थी। पीहू की दादी मेघा से बोलीं, “आजकल बच्चों को स्मार्ट गैजेट्स से शुरुआत में ही परिचित करा दिया जाता है, जिसके कारण वे हमेशा फोन में लगे रहते हैं। लेकिन घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि बच्चे को ऑफ लाइन खेलने के लिए भी कुछ मिल सके।” फिर उन्होंने पीहू से कहा, “आओ चलो, छुपन-छुपाई खेलते हैं। मोबाइल गेम से भी ज्यादा मजा आएगा।” सच में पीहू को बहुत मजा आया। वैसे भी आपको खुद से शुरुआत करनी होगी और पहले खुद फोन से थोड़ी दूरी बनानी होगी, तब बच्चे भी आपके साथ खेलने के इच्छुक बन सकेंगे।
4 of 8
parenting Tips
- फोटो : istock
अच्छा खाना, अच्छा मूड
आज के समय में बाजार में जंक फूड भरा पड़ा है और बच्चों को यह इतना पसंद आता है कि अगर वे एक बार खाना शुरू करते हैं तो रोज खाने की जिद करते हैं। ऐसे में आपको बच्चे के विकास के लिए जंक फूड को बंद करके उन्हें पौष्टिक भोजन देना चाहिए। बच्चे को कभी-कभार ही जंक फूड देना सही है। उनके शारीरिक विकास के लिए पौष्टिक चीजें ही उचित हैं।
“बच्चों के आचार-व्यवहार के साथ-साथ उनका कमरा कैसा है, यह भी बहुत मायने रखता है।” स्पर्धा ने सोनल से कहा तो उसने पूछा, “कैसे?” आप भी जान लीजिए कि कैसे बच्चे के विकास में उसके कमरे की साज-सज्जा सहायक है।
5 of 8
parenting Tips
- फोटो : pixabay
कमरे का रखरखाव
बच्चों को व्यवस्थित रखने के लिए जरूरी है कि उनके कमरे को भी व्यवस्थित रखा जाए। कई बच्चे काफी शरारती होते हैं और कमरे को फैलाकर रखते हैं। ऐसे बच्चों के कमरे को सही तरीके से व्यवस्थित करना बहुत जरूरी है। अगर आप अनेक रंगों का उपयोग कर उनके कमरे को सजाती हैं तो बच्चा इसको लेकर आकर्षित हो सकता है और अपनी किसी भी चीज को गुम किए बिना आसानी से ढूंढ सकता है।
कला-चित्र का उपयोग
बच्चे के कमरे में हाथ से बनी चीजों का उपयोग उसे आकर्षित करती हैं। हाथ से बनी ये चीजें बाजार में आसानी से मिल जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे की मनपसंद चीजों से कमरे को सजाना उसके विकास में सहायक होता है, क्योंकि इससे बच्चा अपने कमरे और चीजों से जुड़ाव महसूस करता है। आप ऐसी चीजें भी उसके कमरे में रख सकती हैं, जो रात में चमकती हों, ताकि वह रात में अकेले सोने से न डरे।