शिव और गौरा का दाम्पत्य जीवन आदर्श दाम्पत्य जीवन के रूप में अनुकरणीय है। जीवन की हर स्थिति, कठिनाई और चुनौती के दौरान उन्होंने एक-दूसरे की शक्ति बनकर साथ दिया। साधन सीमित और बेहद सादा जीवन होने के बावजूद शिव और गौरा का जीवन आनंद और प्रेम का परिचायक है। उन्होंने एक दूसरे की भावनाओं और निर्णय का सदैव सम्मान किया और जीवन के उतार चढ़ाव में सच्चे साथी बनकर अडिग रहे। यदि भोलेनाथ और पार्वती के दाम्पत्य जीवन के सूत्रों को हर दम्पति असल जीवन में आत्मसात करे तो न केवल उनका जीवन खुशहाल और लम्बा होगा, बल्कि वे एक-दूसरे के सच्चे जीवनसाथी के रूप में हमेशा साथ रहेंगे। उन्हें जीवन की बाधाओं और कठिनाईयों से लड़ने का बल मिलेगा और वे हर समस्या का हल ढूंढने में सक्षम होंगे। महाशिवरात्रि पर्व पर जानिए ऐसे ही कुछ गुण जो शिव-गौरा के आदर्श दाम्पत्य जीवन के सूत्र हैं और बनाइए इन्हें अपने जीवन का हिस्सा ।
Mahashivratri 2023: दाम्पत्य जीवन को दें मजबूती शिव-गौरा से लें सीख
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धैर्य का साथ
गौरा को शिव ऐसे ही नहीं मिल गए थे। इसके लिए उन्होंने कठिन तपस्या की थी। शिव का वरण किसी भी लिहाज से आसान नहीं था। पार्वती ये जानती थीं कि उनके लिए लक्ष्य प्राप्ति आसान कतई नहीं होगी। लेकिन उन्होंने धैर्य रखा। यूं भी कहा जाता है कि भोलेनाथ की आराधना और उनको प्रसन्न करने का मार्ग जितना सहज और सरल है, उतना ही कठिन है उन्हें प्रसन्न कर पा जाना। भोलेनाथ सामान्य जंगली फूलों, कंद-मूल और आराधना से प्रसन्न होते हैं लेकिन प्रसन्न होकर वे कब आपको मिलेंगे इसके लिए धैर्य रखने की आवश्यकता होती है। पार्वती ने इसी धैर्य से काम लिया। आम वैवाहिक जीवन में भी यह धैर्य काम आता है। यह धैर्य बड़ी से बड़ी चुनौती से पार जाने और लक्ष्य को पाने में मदद करता है।
सहज रहे जीवन
सोशल मीडिया पर कुछ समय पहले ट्रेंड शुरू हुआ था। बिना फ़िल्टर अपनी तस्वीर पोस्ट करने का। यह कुछ-कुछ ऐसा ही मामला है। जब हम अपना जीवन दूसरों के लिए जीते हैं तो दिखावा करते हैं, जब खुद के लिए जीते हैं तो सहज होते हैं। पति-पत्नी के जीवन को भी बिना फ़िल्टर के जीने की आदत डालें। जो आपके पास है वही सबसे अच्छा है, यह भावना मन में रखें। चाहे लव मैरिज हो या अरेंज, आपकी सहजता वह गुण है जो जीवन भर रिश्ते को बनाये रखने में मददगार होती है। झूठ, दिखावा, कपट जैसी चीजों से जितना दूर रहेंगे उतना रिश्ते के लिए बेहतर होगा। यह सहजता एक-दूसरे के साथ रखें।
शांति का आनंद
शिव-पार्वती के दाम्पत्य जीवन का सबसे बड़ा मंत्र। यदि हर दम्पति अपने जीवन में इस एक बात को भी व्यवहार में उतार ले तो आधे से ज्यादा बहस और झगड़े ही खत्म हो जाएँ। कभी कोई सिचुएशन हड़बड़ी वाली हो, उलझाने वाली हो या गुस्सा दिलाने वाली हो और उस समय शांत दिमाग से निर्णय लिया तो समस्या तुरंत सुलझ सकती है। ऐसा आपकी दफ्तर की मीटिंग की तैयारी में भी काम आता है और घर के बजट में कोई उथल पुथल आने पर भी। एक बार यदि किसी भी स्थिति में शांत दिमाग से काम लेने की आदत पड़ गई तो जीवन में हमेशा यह काम आएगी और आप बेवजह की बहस से बचे रहेंगे।
मुश्किल में हमेशा साथ
चाहे बात पति के सम्मान की हो या पत्नी की जुबान की। एक-दूसरे के साथ दृढ़ता से खड़े रहना बहुत जरूरी है। यह आपका एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य तो है ही, इससे आपका आपसी विश्वास भी मजबूत होता है। शिव-पार्वती के सुदीर्घ वैवाहिक जीवन में इस साथ का हमेशा महत्व रहा है। शिव हमेशा अपनी पत्नी के सम्मान के लिए अडिग रहे और गौरा ने भी हर स्थिति में उनका साथ दिया। यही कारण है कि उनके दाम्पत्य जीवन को आदर्श माना जाता है, जहाँ परस्पर सम्मान की भावना सबसे पहले है। मुश्किल समय में खासकर यह बात बहुत बड़ा संबल बनकर साथ रहती है।