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Chaitra Navratri 2025: मां दुर्गा के नौ स्वरूप से सीखें ये 9 बातें, जीवन बन जाएगा आसान

Sun, 30 Mar 2025 07:41 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sun, 30 Mar 2025 07:41 AM IST
सार

नवरात्रि के मौके पर नौ देवी स्वरूपों से सीखें नौ खास बातें, जिसे जीवन में अपना लिया तो माता के आशीर्वाद से सुख समृद्धि बनी रहेगी और कभी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

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Maa Durga ke 9 roop aur unke jivan se jude rahasya Chaitra Navratri 2025 Durga Mata nine forms significance
चैत्र नवरात्रि पर माता के नौ स्वरूपों के गुण जो देते हैं आदर्श जीवन की सीख - फोटो : freepik

Chaitra Navratri Maa Durga ke 9 Roop: चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 30 मार्च 2025 से हो रहा है। नवरात्रि आदिशक्ति को समर्पित महत्वपूर्ण पर्व होता है जिसमें देवी मां के नौ स्वरूपों की हर दिन उपासना की जाती है। देवी की कई रूपों में पूजा की जाती है। वह जगत जननी हैं जो वहीं मां अन्नपूर्णा भी हैं, मां महालक्ष्मी स्वरूपा हैं तो सरस्वती भी हैं। माता कभी काली -कभी चंडी का स्वरूप धारण कर लेती हैं। कभी वह ब्रह्मचारिणी तो कभी महागौरी के रूप में पूजनीय हैं। उनका हर स्वरूप नारी शक्ति के हर पहलू को दर्शाता है और महिला सशक्तिकरण की एक अद्भुत मिसाल भी पेश करता है। देवी के नौ स्वरूपों का व्यक्तित्व अलग अलग है। उनके नव स्वरूपों से नौ अलग सीख प्राप्त की जा सकती है, जो हर किसी के जीवन में, खासकर महिलाओं के लिए काफी लाभकारी हो सकती हैं। 



नवरात्रि के मौके पर नौ देवी स्वरूपों से सीखें नौ खास बातें, जिसे जीवन में अपना लिया तो माता के आशीर्वाद से सुख समृद्धि बनी रहेगी और कभी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

Maa Durga ke 9 roop aur unke jivan se jude rahasya Chaitra Navratri 2025 Durga Mata nine forms significance
नवरात्रि दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी - फोटो : Amar Ujala

मां दुर्गा के नौ स्वरूप और उनके गुण जिससे लें सीख


माता शैलपुत्री

मां दुर्गा का ये रूप धैर्य और सहनशीलता का प्रतीक हैं। देवी पार्वती को मां शैलपुत्री माना जाता है, जो हिमालय की पुत्री हैं। उनसे यह भी सीख मिलती है कि जिस तरह से पहाड़ मजबूत होते हैं, उसी तरह रिश्तों की नींव मजबूत होनी चाहिए।


मां ब्रह्मचारिणी

माता ब्रह्मचारिणी संयम और तप का प्रतीक हैं जो हमें सिखाता है कि कैसे मुश्किल समय में संयम रख सकते हैं। माता के इस स्वरूप से हमें सीख मिलती है कि रिश्तों में धैर्य और समर्पण होना चाहिए।

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नवरात्रि चौथा दिन मां कूष्मांडा - फोटो : Amar Ujala

मां चंद्रघंटा

नवदुर्गा का चंद्रघंटा स्वरूप भक्ति और सेवा का रूप है, जो हमें समाज के लिए सेवा का भाव सिखाता है। माता चंद्रघंटा रिश्ते में संतुलन का प्रतीक भी हैं जो हमें गुस्से और शांति दोनों का महत्व दर्शाती हैं। 

माता कूष्मांडा 

देवी का यह रूप साहस का प्रतीक है। मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर को हराने के लिए अपना साहस और बल दिरखाया। इसके साथ ही देवी का चौथा रूप सृष्टि के सृजन और संचालन का प्रतीक है। 

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नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा - फोटो : Amar UjalA

देवी स्कंदमाता

मां दुर्गा का यह रूप प्रेम, दया, करुणा और देखभाल का प्रतीक है जो पूर्ण रूप से मातृत्व के गुण को दर्शाता है। इसके अलावा देवी स्कंदमाता ने देवासुर संग्राम में सेनापति की भूमिका अदा की थी।  ये लीडरशिप क्वालिटी को अपनाने की सीख देता है।

माता कात्यायनी

देवी दुर्गा का यह रूप धर्म और न्याय का प्रतीक है। उनसे सीख मिलती है कि रिश्तों में एक दूसरे के लिए खड़े होना चाहिए। साथ ही, एक दूसरे का सम्मान करना भी जरूरी है।

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सिद्धिदात्री की उपासना - फोटो : अमर उजाला

माता कालरात्रि 

यह स्वरूप हमें नकारात्मक चीजों का त्याग करने और कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति देता है। उनसे सीख मिलती है कि रिश्तों में मुश्किल समय आने पर भी साथ रहना चाहिए और मुश्किलों का सामना करना सीखना चाहिए। देवी के इस सप्तम स्वरूप को बुराईयों का नाश करने वाला माना जाता है।

माता महागौरी

महागौरी स्वरूपा माता का पवित्रता का प्रतीक है जो हमें जीवन में शुद्धता और पवित्रता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। माता महागौरी में क्षमा और शांति का गुण है जो हमें सिखाता है कि रिश्तों में एक दूसरे को माफकरना और साफ दिल रखना जरूरी है।

माता सिद्धिदात्री

यह रूप आत्मसमर्पण का प्रतीक है। इस रूप से ये सीख मिलती है कि रिश्तों में एक दूसरे को महत्व देना चाहिए और उनका समर्थन करना चाहिए। तभी रिश्ते सफल होते हैं।

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