इस लड़की से बेइंतहा मोहब्बत करते थे सुभाष चंद्र बोस, दोनों ने यूं आखिरी सांस तक निभाया रिश्ता
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बताया जाता है कि नेताजी की पर्सनैलिटी काफी आकर्षक थी, जिस वजह से वह लड़कियाों की बीच काफी चर्चा में रहते थे। तेज दिमाग और अट्रेक्टिव पर्सनैलिटी के चलते लड़कियां उन्हें बहुत पंसद करती थीं। उनके बारे में कहा जाता है कि कई लड़कियां और महिलाओं ने उन्हें प्रपोज भी किया था, लेकिन वह सबसे दूर ही रहते थे। उन्हें तो सिर्फ प्यार था उस महिला से जिसे वह बेइंतहा मोहब्बत करते थे और जब तक जिंदा रहे उनके नाम खत लिखते रहे।
ऐसे हुआ प्यार का एहसास
साल 1934 में जब ब्रिटिश सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भारत से निर्वासित किया तो वह यूरोप के वियेना चले गए। वह यही रहकर आजादी की लड़ाई से जुड़े साथियों को लगातार चिट्ठियां लिखते रहे। खतों के डिक्टेशन और टाइपिंग के लिए उन्हें एक सहायक की जरूरत थी। तभी उनके एक दोस्त ने मिस एमिली शांक्ले से मिलवाया। नेताजी ने शांक्ले को नौकरी पर रख लिया।
काम के दौरान बढ़ी करीबियां
इसी दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस और एमिली एक दूसरे के प्रति आकर्षत हुए और उनका प्यार परवान चढ़ा। दोनों यूरोप में साथ कई जगह घूमने भी गए। दो साल बाद, 1936 में नेताजी सुभाष चंद्र भारत लौट आए। काम की व्यस्तता के बावजूद वह वक्त निकालकर एमिली को खत लिखते रहे।
नेताजी की लिखी ये चिट्ठियां जब आजादी के सालों बाद प्रकाशित हुईं तो लोगों को उनके रोमांटिक पहलू से रूबरू होने का मौका मिला। इन्हें पढ़कर लगता है मानो चिट्ठियों में वह अपनी सारा प्यार उड़ेल देते थे-
“तुम पहली महिला हो, जिससे मैंने प्यार किया। भगवान से यही चाहूंगा कि तुम मेरे जीवन की आखिरी स्त्री भी रहो।”
“मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक महिला का प्यार मुझको बांध भी सकेगा। इससे पहले बहुतों ने मुझे प्यार करने की कोशिश की लेकिन मैने किसी की ओर नहीं देखा पर तुमने मुझे अपना बना ही लिया।”
शर्मिला बोस के लिखे 'लव इन द टाइम ऑफ वारः सुभाष चंद्र बोस जर्नी टू नाजी जर्मनी' के मुताबिक साल 1937 में बोस वापस एमिली के पास गए। ऑस्ट्रिया के बडगस्टीन शहर में 26 दिसंबर को उन दोनों ने गुप्त शादी कर ली। लेकिन शादी के फौरन बाद बोस जनवरी 1938 में भारत लौट आए।
हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनकी शादी 1942 में हुई।