22 से 28 अक्तूबर तक एसेक्सुअलिटी अवेयरनस वीक मनाया जा रहा है। इसका मकसद इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाना है। एसेक्सुअलिटी उन लोगों को कहा जाता है, जिनको किसी के लिए यौन आकर्षण महसूस नहीं होता। एसेक्सुअलिटी कोई बीमारी या डिसऑर्डर नहीं है। यह एक यौन प्रवृत्ति है जो महिला या पुरुष में से किसी की भी हो सकती है।
पढ़ें- अपने पार्टनर के सामने न खोलें दिल के ये राज, पड़ सकते हैं लेने के देने
एसेक्सुअलिटी इंडिया की सहसंस्थापक पूर्णिमा कुमार के मुताबिक़,'जिस तरह से कुछ लोग विपरीत लिंग में दिलचस्पी रखते हैं (हेट्रोसेक्सुअल), और कुछ लोग समान लिंग की तरफ आकर्षित होते हैं (होमोसेक्सुअल), ठीक उसी तरह कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें दोनों में से किसी के प्रति यौन आकर्षण महसूस नहीं होता। ऐसे लोग एसेक्सुअल की श्रेणी में आते हैं।'
एसेक्सुअलिटी इंडिया एक ऑनलाइन पोर्टल है जो भारत के एसेक्सुअल लोगों को अपने जैसे दूसरे लोगों से जुड़ने का मौका मुहैया कराता है। बीबीसी से बात करते हुए पूर्णिमा ने बताया कि फिलहाल एसेक्सुअलिटी के ज़्यादातर मामले बड़े शहरों में सामने आ रहे हैं।
पूर्णिमा के मुताबिक, एसेक्सुअलिटी का मतलब यह नहीं है कि ऐसे लोग सेक्स नहीं कर सकते। शारीरिक तौर पर पूरी तरह फिट होने के बावजूद ऐसा हो सकता है कि किसी को सेक्स में कोई रुचि न हो और ये ऐसे शख़्स के लिए बिल्कुल सामान्य है।
सेक्सुअल मेडिसिन के सलाहकार और पद्मश्री से सम्मानित डॉक्टर प्रकाश कोठारी इस राय से इत्तेफाक रखते हैं। उनका कहना है कि ये जेनेटिक स्ट्रक्चर है। बाकी यौन रुझानों की तरह ये भी पैदाइशी होता है। बीबीसी से बातचीत में डॉक्टर कोठारी ने बताया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि एसेक्सुअल लोग हमबिस्तर नहीं हो सकते या बच्चे पैदा नहीं कर सकते लेकिन उन्हें इसकी ख़्वाहिश ही नहीं होती।
डॉक्टर कोठारी के मुताबिक, शारीरिक संबंध के चार चरण होते हैं - ख़्वाहिश, अराउजल, प्रवेश और क्लाइमेक्स। एसेक्सुअल लोगों में पहला चरण यानी इच्छा ही नहीं होती इसलिए अगर शारीरिक संबंध बनाएं भी जाए तो एसेक्सुअल पार्टनर का सहयोग मिलना मुश्किल होता है। मशहूर क्लीनिकल साइकॉलॉजिस्ट अरूणा ब्रूटा बताती हैं कि जरूरी नहीं कि सेक्स में दिलचस्पी न होने का हर मामला एसेक्सुअलिटी से जुड़ा हो।