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इस तरह मनाए नवरात्रि का त्योहार , मिलेगा आनंद
Sun, 29 Sep 2019 10:06 AM IST
ललित फुलारा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Sun, 29 Sep 2019 10:06 AM IST
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नगर क्षेत्र के रौजा बाटा के पास दुर्गा पूजा समिति की आेर से स्थापित मा स्थापित मां दुर्गा की मनमोहक प्रतिमा।
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नवरात्रि के आगमन में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं। आपने भी अब नवरात्रि के लिए सारी तैयारियां कर ली होंगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नवरात्रि को हम किस तरह और बेहतर मना सकते हैं?
god
- फोटो : god
मन एवं शरीर को दें आराम
नवरात्रि का पावन अवसर हमारे मन और आत्मा को भी पावन कर देता है। यह वही समय है जब आप अपने रोजमर्रा की शैली को आराम दे सकते हैं।इस अवसर पर आप खुद को रोज़ाना किये जाने वाले कामों से दूर रखें। नवरात्रि के समय अगर आप खाना, बोलना, देखना, छूना, सुनना और सूंघना जैसी क्रियाओं से खुद को अलग कर लेते हैं, तब इन्द्रियों की इन सभी क्रियाओं से भी अलग हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में आप अंतर्मुखी हो जाते हैं। असल मायने में देखा जाए तो यहीं वास्तविक जीवन में आनंद, सुख और उत्साह का स्त्रोत है। अक्सर लोग इस अनुभव को महसूस करने में असमर्थ होते हैं। इसका कारण यह है कि हमारा मन और दिमाग निंरतर किसी न किसी काम में उलझा रहता है। इसलिए नवरात्रि में अपने मन को खुद से अलग कर लेना चाहिए और अपनी आत्मा में विश्राम करना चाहिए। इससे हम अपनी आत्मा को महसूस कर पाएंगे।
नवरात्रि का पावन अवसर हमारे मन और आत्मा को भी पावन कर देता है। यह वही समय है जब आप अपने रोजमर्रा की शैली को आराम दे सकते हैं।इस अवसर पर आप खुद को रोज़ाना किये जाने वाले कामों से दूर रखें। नवरात्रि के समय अगर आप खाना, बोलना, देखना, छूना, सुनना और सूंघना जैसी क्रियाओं से खुद को अलग कर लेते हैं, तब इन्द्रियों की इन सभी क्रियाओं से भी अलग हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में आप अंतर्मुखी हो जाते हैं। असल मायने में देखा जाए तो यहीं वास्तविक जीवन में आनंद, सुख और उत्साह का स्त्रोत है। अक्सर लोग इस अनुभव को महसूस करने में असमर्थ होते हैं। इसका कारण यह है कि हमारा मन और दिमाग निंरतर किसी न किसी काम में उलझा रहता है। इसलिए नवरात्रि में अपने मन को खुद से अलग कर लेना चाहिए और अपनी आत्मा में विश्राम करना चाहिए। इससे हम अपनी आत्मा को महसूस कर पाएंगे।
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अपना मूल जानने की कोशिश करें
नवरात्रि एकमात्र ऐसा अवसर है जब आप इस भौतिक जीवन को छोड़ आध्यात्म जीवन की ओर जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस पावन अवसर पर अपने लिए थोड़ा समय निकालें। खुद को वक्त दें और फिर उन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने कि कोशिश करें जो आपको एक परिपूण मनुष्य बनाती है। साथ ही में यह भी सोचें कि आपका इस मनुष्य जीवन में क्या लक्ष्य है। खुद से आप यह सवाल करें कि आप कौन हैं, आप कहाँ से आए हैं, आपका इस मनुष्य जीवन में क्या लक्ष्य है, आप इस समूचे संसार के लिए क्या कर सकते हैं? अपने भीतर झाकिए अपनी अंतरात्मा से बात कीजिए और प्रभु का नाम लेकर खुद को विश्राम दें।
नवरात्रि एकमात्र ऐसा अवसर है जब आप इस भौतिक जीवन को छोड़ आध्यात्म जीवन की ओर जा सकते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस पावन अवसर पर अपने लिए थोड़ा समय निकालें। खुद को वक्त दें और फिर उन सभी प्रश्नों के उत्तर जानने कि कोशिश करें जो आपको एक परिपूण मनुष्य बनाती है। साथ ही में यह भी सोचें कि आपका इस मनुष्य जीवन में क्या लक्ष्य है। खुद से आप यह सवाल करें कि आप कौन हैं, आप कहाँ से आए हैं, आपका इस मनुष्य जीवन में क्या लक्ष्य है, आप इस समूचे संसार के लिए क्या कर सकते हैं? अपने भीतर झाकिए अपनी अंतरात्मा से बात कीजिए और प्रभु का नाम लेकर खुद को विश्राम दें।
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श्रद्धा रखें
हर व्यक्ति इस ब्रह्माण्ड से जुड़ा हुआ है। उस शक्ति से जुड़ा है जो पूरी सृष्टि का का संचालन कर रही है। यह शक्ति और कुछ नहीं सिर्फ प्रेम है। यह पूरी सृष्टि के कण-कण में प्रेम भरा है। प्रेम एक मात्र ऐसा साधन है जो पूरी सृष्टि को एक-दूसरे से जोड़े रखती है। इसलिए कहते है प्रेम में बहुत ताकत होती है। नवरात्रि का समय वह समय है , जब आपको यह ज्ञात होता है कि इस शक्ति से आप बेहद जुड़े हुए हैं।जब आपको यह ज्ञात हो जाए तब आप खुद को इस प्रेम शक्ति में विश्राम दें। ऐसा करने से आप खुद को अधिक मज़बूत, ज्ञानी और उत्साहित महसूस करेंगे।
हर व्यक्ति इस ब्रह्माण्ड से जुड़ा हुआ है। उस शक्ति से जुड़ा है जो पूरी सृष्टि का का संचालन कर रही है। यह शक्ति और कुछ नहीं सिर्फ प्रेम है। यह पूरी सृष्टि के कण-कण में प्रेम भरा है। प्रेम एक मात्र ऐसा साधन है जो पूरी सृष्टि को एक-दूसरे से जोड़े रखती है। इसलिए कहते है प्रेम में बहुत ताकत होती है। नवरात्रि का समय वह समय है , जब आपको यह ज्ञात होता है कि इस शक्ति से आप बेहद जुड़े हुए हैं।जब आपको यह ज्ञात हो जाए तब आप खुद को इस प्रेम शक्ति में विश्राम दें। ऐसा करने से आप खुद को अधिक मज़बूत, ज्ञानी और उत्साहित महसूस करेंगे।