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Christmas Day: 25 December को ही क्यों मनाया जाता है क्रिसमस,ये है पूरा सीक्रेट
Tue, 25 Dec 2018 12:08 AM IST
मंजू ममगाईं
लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
Published by: मंजू ममगाईं
Updated Tue, 25 Dec 2018 12:08 AM IST
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पूरी दुनिया में प्रभु यीशू का जन्मदिन 25 दिसंबर को क्रिसमस के रूप में मनाया जाता है। प्यार और पवित्रता का संदेश देने वाला ये त्योहार सबसे पहले रोम में 336 ईस्वी में मनाया गया था।वैसे तो बाइबल में जीसस के जन्म की कोई निर्धारित डेट नहीं दी गई है,बावजूद इसके हर साल 25 दिसंबर को क्रिसमस का त्योहार मनाया जाता है।
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हालांकि इस तारीख को लेकर कई बार विवाद भी हुआ। सबसे पहले 336 ई. पूर्व में रोमन के पहले ईसाई रोमन सम्राट के समय सबसे पहले क्रिसमस 25 दिसंबर को मनाया गया। इसके कुछ सालों बाद पोप जुलियस ने आधिकारिक तौर पर जीसस के जन्म को 25 दिसंबर को ही मनाने का ऐलान कर दिया।
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बता दें, क्रिसमस का जश्न 12 दिनों तक चलता है। इसके पीछे जो वजह बताई जाती है वो यह है कि प्रभु यीशू के जन्म के 12वें दिन तीन आलिम उन्हें तोहफे और दुआएं देने आए थे। इस त्योहार के लिए बड़ों से ज्यादा बच्चे ज्यादा उत्साहित रहते हैं। वो क्रिसमस की रात अपनी सभी इच्छाओं को एक कागज में लिखकर सोने से पहले घर की खिड़की के पास रख देते हैं।
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माना जाता है कि रात को ये फरिश्ते नीचे आकर बच्चों की सभी इच्छाओं को प्रभु यीशू तक पहुंचा देते हैं। बता दें, सबसे पहले क्रिसमस ट्री के साथ इस त्योहार को मनाने की शुरुआत उत्तरी यूरोप में हजारों सालों पहले हो हुई थी। उस समय 'Fir'नाम के पेड़ को सजाकर इस फेस्टिवल को मनाया जाता था।
वक्त के साथ धीरे-धीरे क्रिसमस ट्री का चलन हर जगह बढ़ गया। लोग अब क्रिसमस के दिन इस पेड़ को घर लाकर कैंडी, चॉकलेट्स, खिलौने, लाइट्स, बल्ब और गिफ्ट्स से सजाते हैं। मान्यता है कि क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा 1570 में शुरू हुई।
क्रिसमस ट्री एक सदाबहार पेड़ है, जिसकी पत्तियां न तो किसी मौसम में गिरती हैं और न ही कभी मुरझाती हैं। मान्यता है कि क्रिसमस ट्री को सजाने से घर में मौजूद वास्तु दोष भी दूर होते हैं।