भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु का अवतार माना जाता है। पृथ्वी को पाप से मुक्त करने के लिए भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में मानव का अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इसी कारण से हर साल इस तिथि को विशेष पूजन-अर्चन के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल 30 अगस्त को यह तिथि है, पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की विशेष मान्यताएं हैं।
Janmashtami 2021: भगवान कृष्ण की ये हैं वो चार बातें, जिन्हें अपनाकर आपका जीवन भी हो सकता है सफल
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मुश्किल में लोगों के साथ खड़े रहें
भगवान कृष्ण के जीवन से सभी लोगों को यह शिक्षा जरूर लेनी चाहिए कि भले ही आप किसी के सुख का हिस्सा न बन जाएं, पर उनके मुश्किल समय में जरूर साथ रहें। चाहे सुदामा के दुख में खड़े रहने की बात हो या कौरवों से मुकाबले के समय अपने पांडव मित्रों के साथ देने की, भगवान कृष्ण हमेशा अपने मित्रों के दुख में उनके साथ दिखाई देते हैं।
दिल से दोस्त बनाएं, हैसियत देखकर नहीं
भगवान कृष्ण द्वारका के राजा थे, लेकिन जब गरीबी की स्थिति में उनके बचपन के मित्र सुदामा उनसे मिलने आए तो श्रीकृष्ण ने न सिर्फ उनका विशेष आदर सत्कार किया, साथ ही अपने आंसुओं से उनके चरण धोए। श्रीकृष्ण एक राजा थे और सुदामा भिक्षु ब्राह्मण, पर उन्होंने इन सबसे ऊपर बचपन की मित्रता को रखा।
धर्म का मार्ग पर चलें
भगवान कृष्ण हमेशा से धर्म के मार्ग पर चले और अन्य लोगों को भी इसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। महाभारत के युद्ध में विशाल कौरव सेना से मुकाबला करने के लिए पांच पांडव के साथ भगवान कृष्ण खड़े रहे, क्योंकि पांडव हमेशा धर्म के मार्ग पर चलने वाले थे। आखिर में इस भयंकर युद्ध में जीत धर्म की ही हुई। यही कारण है कि सभी ग्रंथ लोगों को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
शांति के लिए अंत तक करते रहें प्रयास
भगवान कृष्ण के जीवन से सीखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात है कि किसी भी विवाद में पड़ने की बजाय शांति का प्रयास अंत तक करते रहें। महाभारत के युद्ध से पहले भगवान कृष्ण स्वयं कौरवों के पास पांडवों का शांतदूत बनकर गए और युद्ध के बजाय शांति से निपटारे का सुझाव दिया, हालांकि अधर्म के मार्ग पर चलने वाले कौरवों ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। नतीजतन कौरवों का सर्वनाश हो गया।