मानसिक स्वास्थ्य विकारों के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन विकारों को सिर्फ मन की बीमारी तक ही सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, अगर इनपर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण कई प्रकार की शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के भी विकसित होने का जोखिम रहता है। जब बात मानसिक स्वास्थ्य की होती है तो इसमें भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थितियां भी शामिल होती हैं। हम कैसे सोचते हैं, महसूस करते हैं, कार्य करते हैं, किन चीजों का चुनाव करते हैं और दूसरों से कैसे संबंध रखते हैं, ये सभी मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
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सेंडेंटरी लाइफस्टाइल आपके लिए हानिकारक
मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए जरूरी है कि आप शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण गुड हार्मोन सेरोटोनिन का रिलीज कम हो जाता है, जो सीधे तौर पर मूड को ठीक रखने के लिए आवश्यक है। इस स्थिति में आपमें सकारात्मक भावनाओं की कमी हो सकती है।
वहीं नियमित योग-व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर इस तरह के जोखिमों को कम किया जा सकता है।
जंक-फास्ट फूड्स भी नुकसानदायक
जंक-फास्ट फूड्स के सेवन को वजन बढ़ाने वाला और शुगर के स्तर को प्रभावित करने वाला माना जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि इससे मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर हो सकता है? चीनी और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ पूरे शरीर और मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकते हैं, जो चिंता और अवसाद सहित मूड विकारों को बढ़ाने का कारण है। आहार में इस तरह की चीजों की मात्रा को कम किया जाना चाहिए।
नींद की कमी के दुष्प्रभाव
अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि नींद की कमी भी मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। नींद की कमी मस्तिष्क के कुछ हिस्सों की गतिविधि बदल सकती है। यदि आप कम नींद लेते हैं, तो ये आपके निर्णय लेने, समस्याओं को सुलझाने, अपनी भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने की स्थिति में बदलाव का भी कारण बन सकती है। सभी लोगों के लिए रोजाना रात में कम से कम 6-8 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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