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World Heart Day 2025: मासूमों के दिल की सेहत खतरे में, 5-9 साल के एक तिहाई बच्चे हाई ट्राइग्लिसराइड्स का शिकार

Mon, 29 Sep 2025 11:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 29 Sep 2025 11:30 AM IST
सार

  • सरकारी रिपोर्ट के अनुसार भारत के 5-9 वर्ष की आयु के करीब एक-तिहाई बच्चों में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर सामान्य से अधिक है, जो उनमें हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। 

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world heart day 2025 one third of Indian children aged 5-9 could have high triglycerides risk of heart issues
बच्चों में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : freepik.com

Heart Problem: हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती देखी जा रही हैं। पहले इसे उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी माना जाता था हालांकि अब किशोर और कम उम्र के बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। हृदय रोग, वैश्विक स्तर पर मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी को इसका प्रमुख कारण माना जाता रहा है। डॉक्टर्स कहते हैं, बच्चों में बढ़ते हृदय रोगों के मामले काफी चिंताजनक हैं, जिसको लेकर हम सभी को  अलर्ट हो जाना चाहिए।



हृदय संबंधी रोगों (सीवीडी) के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और बेहतर खानपान-व्यायाम के माध्यम से हृदय स्वास्थ्य को ठीक रखने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (विश्व हृदय दिवस) मनाया जाता है।

बच्चों में बढ़ते मोटापा और ब्लड प्रेशर की समस्या पहले से ही चिंता का कारण रही है, ये हृदय रोगों का प्रमुख कारण हैं। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने  बच्चों में बढ़ती ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या के लेकर अलर्ट किया है। 

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार देश के 5-9 वर्ष की आयु के करीब एक-तिहाई बच्चों में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर सामान्य से अधिक देखा गया है, जो उनमें हृदय रोगों के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया गया तो भविष्य में ये गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर सकती है।

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बच्चों को हार्ट की समस्या - फोटो : Freepik.com

इन राज्यों के बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट के मुताबिक  जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में बच्चों में हाई ट्राइग्लिसराइड्स की समस्या सबसे अधिक देखी गई है। 

पश्चिम बंगाल में 67 प्रतिशत से ज्यादा, सिक्किम में 64 प्रतिशत, नागालैंड में 55 प्रतिशत, असम में 57 प्रतिशत और जम्मू-कश्मीर में 50 प्रतिशत बच्चों में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर उच्च होने का अनुमान है। केरल और महाराष्ट्र क्रमशः 16.6 प्रतिशत और 19.1 प्रतिशत के साथ सबसे कम स्तर वाले राज्यों में शामिल हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि ये स्थिति इन बच्चों को वयस्कावस्था की उम्र में हृदय रोगों का शिकार बना सकती है।

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कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock

पहले जान लीजिए कि ट्राइग्लिसराइड्स क्या है?

ट्राइग्लिसराइड्स हमारे रक्त में मौजूद एक प्रकार का फैट है जो आगे चलकर हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकती है। ये भोजन और संचित ऊर्जा से निर्मित होती है। ट्राइग्लिसराइड्स वैसे तो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं, लेकिन इनका उच्च स्तर हृदय रोग, स्ट्रोक और मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। 

जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाली चीजें (खासकर चीनी और अस्वस्थ फैट) का सेवन करते  हैं, तो वही अतिरिक्त ऊर्जा ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में शरीर में जमा हो जाती है। जब इसकी मात्रा खून में लगातार बढ़ने लगती है, तो यही फैट धीरे-धीरे धमनियों की दीवारों पर जमा होकर प्लाक बना देता है। यह प्लाक ब्लॉकेज पैदा कर हृदय रोग, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ा देता है।

150 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम के ट्राइग्लिसराइड्स स्तर को सामान्य माना जाता है। 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सामान्य ट्राइग्लिसराइड का स्तर 75 मिलीग्राम से कम होता है।

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बच्चों में हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com

 बच्चों में मृत्यु का खतरा

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 25 सितंबर को चंडीगढ़ में केंद्रीय एवं राज्य सांख्यिकी संगठनों (CoCSSO) के 29वें सम्मेलन के दौरान 'भारत में बच्चे 2025' की रिपोर्ट जारी की गई। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 और व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण 2016-18 जैसे सरकारी मंत्रालयों और विभागों के माध्यम से एकत्रित आंकड़ों को इसमें संकलित किया गया।

  • इस रिपोर्ट के मुताबिक समय से पहले जन्म और जन्म के समय कम वजन की स्थिति नवजात शिशुओं में जीवन के पहले 29 दिनों में मृत्यु का सबसे आम कारण है।
  • जन्म के समय श्वासावरोध (पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना), जन्म के दौरान चोट-निमोनिया क्रमशः 16 प्रतिशत और 9 प्रतिशत की व्यापकता के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रखा गया है।
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बच्चों का खान-पान रखें ठीक - फोटो : freepik.com

ट्राइग्लिसराइड्स कम रखने वाले उपाय जरूरी

रिपोर्ट के लेखकों ने देश के लगभग पांच प्रतिशत किशोरों को उच्च रक्तचाप से ग्रस्त भी बताया है। दिल्ली में यह दर सबसे ज्यादा 10 प्रतिशत है, इसके बाद उत्तर प्रदेश (8.6 प्रतिशत), मणिपुर (8.3 प्रतिशत) और छत्तीसगढ़ (सात प्रतिशत) का स्थान है। भारत में 16 प्रतिशत से ज्यादा किशोरों में हाई ट्राइग्लिसराइड्स होने का अनुमान है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्लड प्रेशर-ट्राइग्लिसराइड्स को बचपन से ही नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। अगर बचपन से हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली अपनाई जाए तो आगे चलकर दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ उपाय जरूरी हैं।

  • बच्चों को जंक फूड और मीठे पेय कम से कम दें।
  • रोजाना फलों, हरी सब्जियों और साबुत अनाज की आदत डालें।
  • टीवी और मोबाइल पर कम समय, बाहर खेलने और शारीरिक गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।
  • परिवार में हेल्दी ईटिंग कल्चर को बढ़ावा दें।
  • समय पर सोने-जागने और तनाव को कम करने के उपाय सिखाने जरूरी है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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