महिलाओं को अपनी सेहत को लेकर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। पीसीओएस जैसी समस्याओं को अनदेखा करना भविष्य में आपके लिए कई प्रकार की समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। अध्ययन से पता चलता है कि प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या की शिकार महिलाओं में 45 वर्ष की आयु से पहले रजोनिवृत्ति होने की आशंका अधिक हो सकती है।
Study: सभी महिलाएं गंभीरता से दें ध्यान, इस समस्या के कारण 45 की आयु में ही हो सकता है मेनोपॉज
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम और समय से पहले मेनोपॉज
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर भारतीय महिलाओं को 50-55 की आयु के बीच मनोपॉज होती है, कुछ स्थितियां इसके समय में बदलाव का कारण हो सकती हैं।
जामा नेटवर्क जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या की शिकार महिलाओं में कई प्रकार के जोखिम अधिक हो सकते हैं। अध्ययनकर्ताओं ने 3,600 से अधिक प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया जिसके निष्कर्षों को लेकर अलर्ट किया गया है। पीएमडी वाली महिलाओं में जल्दी रजोनिवृत्ति होने की आशंका दोगुनी से अधिक थी।
प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में कई प्रकार की प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की दिक्कतें हो सकती हैं। प्रीमेन्स्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (पीएमडीडी) एक कम आम समस्या है जो महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, त्वचा और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के तौर पर प्रभावित करने वाली मानी जाती है।
पिहले के शोध में पता चलता है कि प्रजनन के वर्षों के दौरान पीएमडी की स्थिति उच्च रक्तचाप, हृदय की बीमारियों और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?
नॉर्थ अमेरिकन मेनोपॉज़ सोसाइटी की मेडिकल डायरेक्टर स्टेफ़नी फ़ॉबियन कहती हैं, समय से पहले मेनोपॉज की समस्या के जोखिम वाली महिलाओं की पहचान बहुत जरूरी है क्योंकि इसका संबंध हृदय स्वास्थ्य में गड़बड़ी, मस्तिष्क और हड्डियों की समस्याओं के जोखिम से भी होता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि अध्ययन अवलोकनात्मक है, जिसका अर्थ है कि शोधकर्ता यह नहीं कह रहे हैं कि पीएमडी के कारण जल्दी रजोनिवृत्ति होगी ही बल्कि, अध्ययन से पता चलता है कि दोनों के बीच एक संबंध हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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