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चर्चा में: 23 साल तक पता ही नहीं चला महिला को है डाउन सिंड्रोम की समस्या, जानिए इस रोग के बारे में

Sun, 16 Jul 2023 07:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 16 Jul 2023 07:42 PM IST
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Woman discovers she has Down syndrome aged 23, know about this diseases and risk factor
23 की उम्र में डाउन सिंड्रोम का निदान (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay

ब्रिटेन में 23 साल की एक महिला उस समय हतप्रभ रह गई जब उसे पता चला है कि वह डाउन सिंड्रोम नामक बीमारी की शिकार है। एशले जाम्बेली जीवन के 23 साल इस बीमारी से अनजान जीती रहीं। फरवरी 2023 में उनमें जेनेटिक परीक्षण के बाद डाउन सिंड्रोम का पता चला। एशले कहती हैं, उम्र बढ़ने के साथ मुझे ऐसा तो लगता रहता था कि जैसे मेरे घुटनों में कोई दिक्कत है, जबड़े थोड़े तिरछे हैं, गति कभी कभी बाधित हो जाती है और हार्ट रेट बढ़ा रहता था, पर कभी इस बात का पता नहीं चल सका कि मैं डाउन सिंड्रोम की शिकार हूं।



डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति, क्रोमोसोम 21 की एक अतिरिक्त कॉपी के साथ पैदा होता है। इसका मतलब है कि उनके पास 46 के बजाय कुल 47 क्रोमोसोम होते हैं। यह उनके मस्तिष्क और शरीर के विकास को प्रभावित कर सकता है। कई लोगों को इसके कारण चलने-उठने जैसे जीवन के सामान्य कार्यों को करने में भी समस्या हो सकती है।

Woman discovers she has Down syndrome aged 23, know about this diseases and risk factor
डाउन सिंड्रोम के बारे में जानिए - फोटो : istock

घरवालों को भी नहीं चला समस्या का पता

आश्चर्यजनक रूप से डॉक्टरों को भी कभी इस समस्या का अंदाजा नहीं हुआ। इसका पता तब चला जब गर्भावस्था के दौरान एशले की रिप्रोडेक्टिव हिस्ट्री देखी गई। इसमें पता चला कि एशले ने छह बार गर्भधारण किया उसमें से तीन में डाउन सिंड्रोम की समस्या थी। आनुवंशिक परीक्षण में पता चला कि उसे मोजेक डाउन सिंड्रोम है।

एशले की मां कहती है जब इसका जन्म हुआ तो उसमें डाउन सिंड्रोम के कोई भी लक्षण नहीं थे। 12 साल की उम्र से उसके घुटनों की कटोरी अक्सर अपनी जगह से हट जाती थी। कंधा भी स्थायी रूप से सॉकेट से बाहर था। दिल हमेशा धड़कता रहता है, सांसें हमेशा फूलती रहती थीं।

आइए जानते हैं कि आखिर ये समस्य होती क्या है?

Woman discovers she has Down syndrome aged 23, know about this diseases and risk factor
बच्चों में डाउन सिंड्रोंम की समस्या - फोटो : iStock

डाउन सिंड्रोम की समस्या के बारे में जानिए

डाउन सिंड्रोम किसी को भी प्रभावित कर सकता है। यह एक आनुवंशिक स्थिति है। डाउन सिंड्रोम के जोखिम कारकों के बारे में अधिक जानने के लिए अनुसंधान जारी है। अध्ययनों से पता चलता है कि जैसे-जैसे माता-पिता की उम्र बढ़ती है, डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे को जन्म देने का जोखिम बढ़ सकता है।

डाउन सिंड्रोम अमेरिका में होने वाला सबसे आम प्रकार का गुणसूत्र संबंधी विकार है। अनुमान है कि अमेरिका में हर साल लगभग 6,000 बच्चे इस समस्या के साथ पैदा होते हैं, जोकि प्रत्येक 700 शिशुओं में से लगभग 1 के बराबर है। अमेरिका में लगभग दो लाख लोग डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं।

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Woman discovers she has Down syndrome aged 23, know about this diseases and risk factor
डाउन सिंड्रोम हो सकता है आनुवांशिक - फोटो : iStock

डाउन सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?

डाउन सिंड्रोम शारीरिक, संज्ञानात्मक और व्यवहार संबंधी समस्याओं का कारण बनता है। डाउन सिंड्रोम के शारीरिक लक्षण आमतौर पर जन्म के समय मौजूद होते हैं और जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, वे अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। इसमें नाक का सपाट होना, झुकी हुई आंखें,  छोटी गर्दन, छोटे कान, हाथ और पैर की समस्या हो सकती है। इसके अलावा भी कुछ लक्षणों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 

  • जन्म के समय मांसपेशियों की टोन कमजोर होना।
  • औसत से कम ऊंचाई
  • कान में संक्रमण या सुनने की क्षमता में कमी।
  • दृष्टि संबंधी समस्याएं या नेत्र रोग।
  • दांतों की समस्या।
  • संक्रमण या बीमारियों का अधिक खतरा होना।
  • जन्मजात हृदय रोग।
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बच्चों के विकास को प्रभावित करती है ये समस्या - फोटो : iStock

एशले में पता चला मोजेक डाउन सिंड्रोम क्या है?

मोजेक डाउन सिंड्रोम, डाउन सिंड्रोम का सबसे दुर्लभ प्रकार है और सभी मामलों में यह सिर्फ एक प्रतिशत लोगों में होता है। मेडिकल रिपोर्ट्स के पता चलता है कि जरूरी नहीं है कि आपको इसके स्पष्ट लक्षण दिखें ही। यही कारण है कि एशले में इस रोग के निदान में 23 साल का समय लग गया। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को बच्चों में लक्षणों की जांच जरूर करनी चाहिए।




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स्रोत और संदर्भ
I found out I had Down syndrome aged 23 – people don’t believe I have it’


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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