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Health Alert: रात में 12 बजे के बाद सोते हैं तो हो जाइए सावधान, घेर लेंगी ये गंभीर बीमारियां

Mon, 11 Nov 2024 07:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Mon, 11 Nov 2024 07:39 PM IST
सार

बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो देर रात या 12 बजे के बाद सोते हैं। रात में देर से सोने और नींद पूरी न होने की स्थिति सेहत के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकती है।

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देर से सोने की आदत - फोटो : Freepik.com

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी रोजाना रात में अच्छी नींद लेना है, उतना ही समय पर सोना और जागना भी है। ज्यादातर अध्ययन कहते हैं, रात में 10 बजे तक सो जाना चाहिए। मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने और आपको कई प्रकार की बीमारियों से बचाए रखने के लिए ये जरूरी है।



हालांकि डॉक्टर्स कहते हैं, बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो देर रात या 12 बजे के बाद सोते हैं। रात में देर से सोने और नींद पूरी न होने की स्थिति सेहत के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, अगर आप रात में अक्सर देर से सोते हैं तो इससे मूड से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दीर्घकालिक तौर पर इसके सेहत से संबंधित और भी कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। आजकल की दौड़ती-भागती जीवनशैली, बढ़ते डिजिटल स्क्रीन के इस्तेमाल और काम के दबाव के कारण नींद भी काफी अधिक प्रभावित हो गई है। अगर आप भी इसका शिकार हैं तो सावधान हो जाइए।

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नींद विकारों का खतरा - फोटो : Freepik.com

रात में देर रात तक जागना हानिकारक

डॉक्टर कहते हैं, जब हम रात में देर रात तक जागते हैं, तो इससे हमारी नींद का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है। इसके कारण गहरी नींद नहीं मिल पाती है जो कि शारीरिक और मानसिक रूप से शरीर को रिफ्रेश करने के लिए जरूरी है। नींद का चक्र बाधित होने से नींद की अवधि और गुणवत्ता भी प्रभावित होने लगती है। ये मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्याओं, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य सभी के लिए हानिकारक है।

डॉक्टर बताते हैं, वयस्कों के लिए रात में 10 से 11 बजे तक सो जाना अच्छा माना जाता है। 12 बजे या इसके बाद सोने की आदत कई प्रकार की बीमारियों को बढ़ाने वाली हो सकती है।

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मेटाबॉलिज्म विकारों का जोखिम - फोटो : Freepik.com

मेटाबोलिज्म की समस्या

रात में देर से सोने से मेटाबोलिज्म पर बुरा असर पड़ता है। शोध से पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से देर से सोते हैं, उनके शरीर में वसा का स्तर बढ़ सकता है। मेटाबोलिज्म धीमा होने से वजन बढ़ने की आशंका अधिक होती है और मोटापे का खतरा बढ़ता है। अधिक वजन की स्थिति डायबिटीज, हृदय रोग और पाचन से संबंधित कई अन्य विकारों का भी कारण बन सकती है। 

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स्ट्रेस और डिप्रेशन का खतरा - फोटो : Freepik.com

मेंटल हेल्थ पर असर

अच्छी नींद लेना मेंटल हेल्थ को ठीक रखने के लिए जरूरी है। देर रात तक जागने से मूड स्विंग्स, अवसाद (डिप्रेशन) और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं जन्म ले सकती हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि जब आप रात में देर से सोते हैं तो इससे शरीर में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे हार्मोन्स का असंतुलन हो सकता है जिसके कारण मानसिक थकावट और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। दीर्घकालिक रूप से ये स्ट्रेस और एंग्जाइटी को भी बढ़ा सकती है।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com

हार्ट और डायबिटीज का खतरा

रात में देर तक जगने की आदत को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ाने के लिए जिम्मेदार पाया गया है। नींद की कमी से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है। इस आदत से हृदयघात (हार्ट अटैक) स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसी तरह से देर से सोने वाले लोगों के लिए शुगर के स्तर को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो सकता है। इससे शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता घट जाती है, जो रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मुश्किल पैदा करती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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