हमारा शरीर दिनभर कितना एक्टिव रहेगा, ये बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि हमारी दिन की शुरुआत कैसे हुई है? सुबह उठकर हम क्या करते है, क्या खाते हैं? इसका भी सेहत पर सीधा असर होता है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से लोगों के लिए सुबह का नाश्ता छोड़ना सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है? स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों के लिए रोज सुबह सूरज की रोशनी में कुछ समय बिताना भी बहुत जरूरी है।
सेहत की बात: सुबह की धूप में 10 मिनट बिताना क्यों जरूरी? जानिए धूप न मिलने से क्या दिक्कतें होती हैं
सुबह की प्राकृतिक रोशनी शरीर की जैविक घड़ी यानी सर्केडियन रिदम को सही संकेत देने में मदद करती है। लंबे समय तक धूप न मिलने से विटामिन-डी की कमी का जोखिम बढ़ सकता है।
शरीर में विटामिन-डी के लिए भी धूप बहुत जरूरी माना जाता है। त्वचा पर पड़ने वाली यूवीबी किरणों की मदद से शरीर विटामिन डी बनाता है। इसलिए सुबह बाहर निकलना और कुछ समय सूरज की रोशनी में बिताना जरूरी है। आइए जानते हैं कि अगर आप सुबह सूरज की रोशनी नहीं लेते हैं तो शरीर पर इसका क्या असर हो सकता है?
सर्केडियन रिदम बिगड़ने का खतरा
प्राकृतिक रोशनी शरीर की सर्केडियन रिदम को समय का संकेत देती है। रिसर्च में पाया गया है कि सुबह की रोशनी सर्केडियन रिदम को बैलेंस रखने और दिन में सतर्कता बढ़ाए रखने में मदद करती है।
- जिन लोगों को रोज सुबह सूरज की रोशनी नही मिलती है, दिन का अधिकांश समय घर या कृत्रिम रोशनी में बीतता है उनका सोने-जागने का समय बिगड़ सकता है। पहले से ही नींद की समस्याओं के शिकार लोगों के लिए ये और भी समस्याएं बढ़ाने वाला हो सकता है।
विटामिन-डी की कमी का जोखिम
- शरीर सूर्य की किरणों की मदद से विटामिन-डी बनाता है। लंबे समय तक बहुत कम धूप मिलने से विटामिन-डी की कमी का खतरा हो सकता है। इसकी कमी से बच्चों में रिकेट्स और वयस्कों में हड्डियों की कमजोरी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
मूड पर असर पड़ सकता है असर
- प्राकृतिक रोशनी और शरीर के सर्केडियन रिदम का संबंध मूड से भी है। दिन में पर्याप्त रोशनी न मिलने और नींद का चक्र बिगड़ने से कुछ लोगों में उदासी, चिड़चिड़ापन और लो एनर्जी जैसी समस्याओं का खतरा हो सकता है। जो लोग दिन का ज्यादातर समय बंद कमरे में बिताते हैं, उनके लिए दिन में ये और भी दिक्कतें बढ़ा सकता है।
ध्यान और काम करने की क्षमता पर असर
नींद का समय बिगड़ने का असर अगले दिन दिमागी क्षमता पर भी पड़ सकता है। नींद कम या खराब होने पर ध्यान केंद्रित करने, चीजों को याद रखने और लगातार किसी काम पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है। अगर सुबह की रोशनी कम मिलने के साथ रात में देर तक मोबाइल चलाने और देर से सोने की आदत भी है, तो इससे ब्रेन फॉग जैसा महसूस होने का जोखिम रहता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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