कोरोना महामारी के कारण देश में हालात हर रोज बिगड़ते जा रहे हैं। संक्रमितों के बढ़ते मामलों को कम करने के लिए सरकार ने देश में वैक्सीनेशन को तेज कर दिया है। वहीं रोगियों की जान बचाने के लिए डॉक्टर भी हर संभव कोशिश कर रहे हैं। इस बीच कोविड रोगियों के इलाज के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली कई दवाओं की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि इन दवाओं के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इनका इस्तेमाल सही तरीके और सही समय पर नहीं किया गया तो आने वाले समय में देश को एक और महामारी का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि आखिर विशेषज्ञ किस बात को लेकर इस तरह की चिंता जता रहे हैं?
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सावधान: ऐसी गलती न करें डॉक्टर, नहीं तो आ सकती है एक और महामारी, विशेषज्ञों ने किया आगाह
Tue, 11 May 2021 04:51 PM IST
Abhilash Srivastava
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhilash Srivastava
Updated Tue, 11 May 2021 04:51 PM IST
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एक और महामारी को लेकर आशंका
- फोटो : istock
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दूसरी लहर में तेजी से बढ़ रही है गंभीरता
- फोटो : Social media
दूसरे लहर की गंभीरता को समझना जरूरी
अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान आईआईपीएच गांधीनगर में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना कहते हैं कि कोविड की दूसरी लहर कई मायनों में हमारे लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पहली और दूसरी वेब के क्लीनिकल लक्षणों में भी काफी अंतर देखा जा रहा है। पहली लहर में जहां संक्रमितों के दसवें और ग्यारहवें दिन को गंभीर माना करते थे वहीं इस बार रोगियों में गंभीरता तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। दूसरी लहर में रोगी का पांचवें से सातवां दिन काफी क्रिटिकल हो जाता है। हमारे लिए कोविड की दूसरी वेब की गंभीरता को समझना बेहद जरूरी है।
अमर उजाला से एक बातचीत के दौरान आईआईपीएच गांधीनगर में महामारी विशेषज्ञ डॉ दीपक सक्सेना कहते हैं कि कोविड की दूसरी लहर कई मायनों में हमारे लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पहली और दूसरी वेब के क्लीनिकल लक्षणों में भी काफी अंतर देखा जा रहा है। पहली लहर में जहां संक्रमितों के दसवें और ग्यारहवें दिन को गंभीर माना करते थे वहीं इस बार रोगियों में गंभीरता तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। दूसरी लहर में रोगी का पांचवें से सातवां दिन काफी क्रिटिकल हो जाता है। हमारे लिए कोविड की दूसरी वेब की गंभीरता को समझना बेहद जरूरी है।
स्टेरॉयड दवाओं का गलत इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक
- फोटो : पीटीआई
क्यों एक और महामारी को लेकर जताई जा रही है चिंता
दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन कहते हैं कि इन दिनों मरीजों को स्टेरॉयड दवाएं ज्यादा दी जा रही हैं। अगर संक्रमण की शुरुआत में ही रोगी को स्टेरॉयड दे दी जाए जबकि उसे इसकी ज्यादा जरूरत न हो तो आने वाले हफ्तों में बीमारी के और गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा जिन रोगियों में स्टेरॉयड के इस्तेमाल के सही समय का निर्धारण नहीं हो पा रहा है और स्थिति बिगड़ने पर इसकी हाई डोज दी जा रही है, उनमें इसके साइड-इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं। इस वजह से आने वाले दिनों में स्टेरॉयड के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डाइबिटीज आदि की माहामारी देखने को मिल सकती है।
दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ आशीष जैन कहते हैं कि इन दिनों मरीजों को स्टेरॉयड दवाएं ज्यादा दी जा रही हैं। अगर संक्रमण की शुरुआत में ही रोगी को स्टेरॉयड दे दी जाए जबकि उसे इसकी ज्यादा जरूरत न हो तो आने वाले हफ्तों में बीमारी के और गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा जिन रोगियों में स्टेरॉयड के इस्तेमाल के सही समय का निर्धारण नहीं हो पा रहा है और स्थिति बिगड़ने पर इसकी हाई डोज दी जा रही है, उनमें इसके साइड-इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं। इस वजह से आने वाले दिनों में स्टेरॉयड के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डाइबिटीज आदि की माहामारी देखने को मिल सकती है।
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एंटीबायोटिक रसिस्टेंस महामारी का खतरा बढ़ा
- फोटो : Social media
विशेष सावधानी की जरूरत
स्टेरॉयड ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ा देता है, वहीं कोविड के चलते रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता वैसे ही प्रभावित है, ऐसे में कोविड से ठीक होने के बाद लोगों में म्यूकॉरमाइकोसिस जैसे फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा एंटीबायोटिक के भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल के कारण आने वाले दिनों में 'एंटीबायोटिक रसिस्टेंस' जैसी महामारी की आशंका बनी हुई है।
स्टेरॉयड ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ा देता है, वहीं कोविड के चलते रोगियों की प्रतिरोधक क्षमता वैसे ही प्रभावित है, ऐसे में कोविड से ठीक होने के बाद लोगों में म्यूकॉरमाइकोसिस जैसे फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा एंटीबायोटिक के भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल के कारण आने वाले दिनों में 'एंटीबायोटिक रसिस्टेंस' जैसी महामारी की आशंका बनी हुई है।
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- फोटो : iStock
रेमेडिसविर जैसी दवाइयों को लेकर मारामारी क्यों?
डॉ आशीष जैन कहते हैं कि कोविड को ठीक करने के लिए अब तक कोई मान्यता प्राप्त दवा नहीं है, इसलिए जिसके हाथ में जो आ रहा है, वह उसी का इस्तेमाल शुरू कर दे रहे हैं। यही कारण है कि कोविड की कई दवाइयों की हाल के दिनों में कालाबाजारी भी देखने को मिली है। पिछले साल जैसे हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर मारामारी थी, वैसे ही इस बार रेमेडिसविर को लेकर देखी जा रही है, जबकि क्लीनिकल स्टडीज में ऐसी दवाइयों को बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं पाया गया है।
डॉ आशीष जैन कहते हैं कि कोविड को ठीक करने के लिए अब तक कोई मान्यता प्राप्त दवा नहीं है, इसलिए जिसके हाथ में जो आ रहा है, वह उसी का इस्तेमाल शुरू कर दे रहे हैं। यही कारण है कि कोविड की कई दवाइयों की हाल के दिनों में कालाबाजारी भी देखने को मिली है। पिछले साल जैसे हाइड्राक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर मारामारी थी, वैसे ही इस बार रेमेडिसविर को लेकर देखी जा रही है, जबकि क्लीनिकल स्टडीज में ऐसी दवाइयों को बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं पाया गया है।