खान-पान को ठीक रखना अच्छी सेहत के लिए कितना जरूरी है, ये हम सभी अच्छे से समझ चुके हैं। पर क्या वास्तव में हमारा खान-पान ठीक है?
हेल्थ टिप्स: अच्छी सेहत वाली डाइट का ये सीक्रेट जानते हैं आप? समझिए हेल्थ का आसान मंत्र
रंगीन थाली का मतलब सिर्फ सुंदर दिखने वाला खाना नहीं, बल्कि डाइट में विविधता लाना है। अलग-अलग फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और अन्य पौष्टिक खाद्य शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व देते हैं।
हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वस्थ आहार चार चीजों से तय होता है- पर्याप्तता, संतुलन, संयम और विविधता। यानी अच्छी डाइट सिर्फ किसी एक सुपरफूड या एक खास सब्जी पर निर्भर नहीं होती, बल्कि पूरी थाली के संतुलन पर निर्भर करती है।
रंगीन थाली से मिलता है बेहतर पोषण
हरी पत्तेदार सब्जियों से लेकर लाल-पीली, नारंगी और बैंगनी रंग की सब्जियों और फलों तक, अलग-अलग पौधों में अलग प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं। इसलिए रोज एक ही सब्जी खाने के बजाय अलग-अलग सब्जियां खाएं है। खाने में विविधता बढ़ाने से शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति की जा सकती है।
हर रंग के अलग फायदे
थाली में अलग-अलग रंग वाली चीजें बढ़ाने से ज्यादा से ज्यादा पोषक तत्वों की प्राप्ति हो सकती है। जैसे हरी सब्जियां कई जरूरी विटामिन और खनिज देती हैं, जबकि लाल, पीले, नारंगी और बैंगनी रंग के पौधों में अलग-अलग एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं।
- कोशिश करें कि हर दिन एक ही तरह की सब्जी या फल खाने के बजाय मौसम के हिसाब से अलग-अलग विकल्प बदलते रहें। इससे डाइट में विविधता बढ़ती है और शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं।
सिर्फ फल-सब्जियां ही काफी नहीं
स्वस्थ आहार में फल और सब्जियों के साथ साबुत अनाज, दालें और अन्य प्रोटीन वाले स्रोत भी जरूरी हैं। डाइट में पर्याप्त फाइबर के लिए साबुत अनाज, दालें और सब्जियों को शामिल करें। डब्ल्यूएचओ 10 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए रोज कम से कम 400 ग्राम फल और सब्जियां लेने की सलाह देता है।
डब्ल्यूएचओ भी स्वस्थ आहार में संयम और संतुलन को जरूरी मानता है। अच्छी सेहत के लिए अलग-अलग पौष्टिक तत्वों पर ध्यान देना जरूरी है। स्वस्थ भोजन के लिए संतुलन, पर्याप्तता, संयम और विविधता चारों जरूरी हैं।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।