योग, हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। शरीर में ऊर्जा को संतुलित करने से लेकर, लचीलापन बढ़ाने और तनाव की समस्या से छुटकारा दिलाने तक के लिए योग के लाभ का जिक्र मिलता है। कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी योग को लाभदायक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक तनाव की समस्या हाइपोथायरायडिज्म का कारक हो सकती है। योग गुरुओं के मुताबिक कुछ योग मुद्राएं थायरॉइड के स्तर को संतुलित करने के साथ इसकी जटिलताओं को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
आज का योग: थायरॉइड की समस्या से हैं परेशान? इन तीन योगासनों से दिखने लगेगा जल्द आराम
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थायरॉइड में योग के लाभ
योग विशेषज्ञों के मुताबिक कई प्रकार के योगासनों के माध्यम से गले को उत्तेजित करने में सहायता मिल सकती है। थायरॉइड के लिए किए जाने वाले योग थायरॉइड ग्रंथि के आसपास रक्त परिसंचरण और ऊर्जा प्रवाह में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं। योग पोज के माध्यम से थायरॉइड की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में थायरॉइड के लिए फायदेमंद योगासनों के बारे में जानते हैं।
ब्रिज पोज योग के लाभ
ब्रिज पोज योग, पीठ और रीढ़ की हड्डी को मजबूती देने के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि इस योग से थायरॉइड के लक्षणों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इस योगासन को करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं। अपने पैरों को कंधे की चौड़ाई से थोड़ा अलग करते हुए घुटनों को मोड़ लें। हथेलियों को खोलते हुए हाथ को बिल्कुल सीधा जमीन पर सटा कर रखें। अब सांस लेते हुए कमर के हिस्से को ऊपर की ओर उठाएं, कंधे और सिर को सपाट जमीन पर ही रखें। सांस छोड़ते हुए दोबारा से पूर्ववत स्थिति में आ जाएं।
कोबरा पोज योगासन
थायरॉइड में कोबरा पोज योगासन के फायदों का जिक्र मिलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोबरा पोज गले और थायरॉयड को उत्तेजित करने में सहायक माना जाता है। कोबरा मुद्रा के लिए जमीन पर लेट जाएं और अपनी हथेलियों को फर्श पर कंधे की चौड़ाई से अलग रखें। अपने निचले शरीर को जमीन पर रखते हुए श्वास लें और अपनी छाती को फर्श से उठाते हुए छत की ओर देखें। सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को फर्श पर दोबारा लेकर आएं। इस योग को रोजाना 5-10 मिनट तक करें।
कैट-काउ पोज
योग विशेषज्ञों के मुताबिक थायरॉइड की समस्या से परेशान लोगों के लिए कैट-काउ पोज का अभ्यास करना काफी फायदेमंद हो सकता है। गले में रक्त के प्रवाह को निरंतर जारी रखने के लिए इस योगासन के काफी लाभ मिल सकते हैं। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले अपनी कलाइयों और घुटनों की मदद से चौपाया जानवरों जैसी मुद्र बना लें। अब गहरी श्वास लें और छोड़ें। इसके बाद सांस लेते हुए छत की ओर देखें और सांस छोड़ें। इस योग को रोजाना 5-10 मिनट तक करें।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।