शरीर में खून की कमी (एनीमिया) की समस्या स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है। दुर्भाग्यवश भारतीय महिलाओं में इसका खतरा काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। एनीमिया के कारण थकान, कमजोरी जैसी सामान्य समस्याओं के साथ त्वचा के रंग में बदलाव और सांस की दिक्कतों का जोखिम भी देखा जाता रहा है। पर इसके दुष्प्रभाव यहीं तक सीमित नहीं हैं।
Study: क्या आपमें भी खून की कमी है? वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट- खो सकते हैं दिमागी ताकत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनीमिया के कारण अल्जाइमर रोग का खतरा
अल्जाइमर रोग, मस्तिष्क स्वास्थ्य विकार है, जो समय के साथ चीजों को याद रखने, सोचने-तर्क करने और समस्याओं को हल करने की दिमागी ताकत को कम कर देती है। अल्जाइमर के गंभीर मामलों में डिमेंशिया का खतरा हो सकता है। एनीमिया वाले लोगों में इसके जोखिमों को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने तीन लाख से अधिक लोगों पर अध्ययन किया, जिसके आधार पर पाया गया कि खून की कमी के शिकार लोगों को समय के साथ अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया होने का खतरा 56 फीसदी तक अधिक हो सकता है।
एक अन्य अध्ययन में कैनसस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया गया कि एनीमिया वाले अल्जाइमर के रोगियों का मस्तिष्क सिकुड़ सकता है, जिससे बीमारी के बदतर होने का खतरा रहता है।
मस्तिष्क की सेहत पर होने वाले दुष्प्रभाव
वैज्ञानिकों ने शोध के दौरान पाया कि ऐसे कई तरीके हैं जिनसे एनीमिया, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है और दिमाग की कार्यात्मक क्षमता में कमजोरी का कारण बन सकता है।
एनवाईयू लॉन्ग आइलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर एलिसन बी. रीस कहते हैं, अल्जाइमर रोग के परिणामस्वरूप तंत्रिकाओं में होने वाली क्षति के कारण स्मृति, सोचने की क्षमता और व्यवहार में परिवर्तन हो सकता है। आयरन की कमी मस्तिष्क की प्रक्रियाओं में बाधा पैदा कर सकती है जो न्यूरोट्रांसमीटर और माइलिन के उत्पादन और इनके सामान्य कार्यों को प्रभावित करती है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
प्रोफेसर रीस कहते हैं, यदि किसी व्यक्ति को पहले से अल्जाइमर या डिमेंशिया की समस्या है तो एनीमिया के कारण लक्षणों के बिगड़ने का भी खतरा रहता है। शोध में पाया गया है कि एनीमिया मस्तिष्क में ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म को भी कम कर देती है, जो मस्तिष्क में ऊर्जा उत्पादन का तंत्र है। अल्जाइमर रोग के जोखिमों के लिए इसे भी एक कारक माना जा सकता है। सभी लोगों को कम उम्र से ही शरीर में खून की मात्रा बेहतर बनाने वाले प्रयास करते रहने चाहिए।
भारतीय लोगों में एनीमिया का खतरा
एक अनुमान के मुताबिक आधे से अधिक भारतीय महिलाओं और तीन चौथाई बच्चों में खून की कमी हो सकती है। यह आंकड़े निश्चिच ही चिंताजनक है, क्योंकि एनिमिया न सिर्फ आपको कमजोर बनाती है साथ ही अल्जाइमर जैसे गंभीर रोगों के जोखिमों को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। पुरुषों में भी इसका खतरा हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि आहार की पौष्टिकता का ध्यान रखा जाए और जो खून की कमी को दूर करने में आपके लिए सहायक हो सकता है।
----------------
स्रोत और संदर्भ
Associations of blood cell indices and anemia with risk of incident dementia
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।