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What Is PMS: अचानक क्यों बढ़ जाता है महिलाओं का चिड़चिड़ापन? जानें ऐसे समय में क्या करना चाहिए
Thu, 19 Mar 2026 12:57 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Thu, 19 Mar 2026 12:57 PM IST
सार
What is Premenstrual Syndrome: ज्यादातर महिलाओं को ही समझ नहीं आता कि पीरियड आने के कई दिन पहले से उन्हें इतनी दिक्कत होना क्यों शुरू हो जाती है। यही प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम कहलाता है। यहां हम आपको इसके बारे में डिटेल में बताएंगे।
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जानें क्या होता है PMS?
- फोटो : अमर उजाला
What is Premenstrual Syndrome: कभी आपने गौर किया है कि पीरियड आने से कुछ दिन पहले आपका मूड अचानक बदल जाता है, थकान महसूस होती है और हर छोटी-सी बात पर चिड़चिड़ाहट आ जाती है? यही वह समय होता है जब आपके शरीर और दिमाग हार्मोनल “सिग्नल” भेजते हैं। इसे ही प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम या PMS कहा जाता है।
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- फोटो : Freepik.com
PMS के सामान्य लक्षण
- PMS के दौरान महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक बदलाव महसूस होते हैं।
- पेट में सूजन, गैस, कब्ज और स्तनों में दर्द आम लक्षण हैं।
- सिरदर्द, थकान और नींद में बदलाव भी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम का हिस्सा हैं।
- इस दौरान कुछ महिलाओं में भूख में बदलाव देखा जाता हैं।
- इसके अलावा बहुत सी महिलाएं मुंहासे या बालों का झड़ना से भी परेशान होती हैं।
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- फोटो : Adobe Stock
PMS के मुख्य कारण
PMS के लक्षण मुख्यतः हार्मोनल और न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन से जुड़े होते हैं। मासिक चक्र के दौरान एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बदलता है, जिससे शरीर में पानी और सोडियम का संतुलन प्रभावित होता है। सेरोटोनिन का स्तर मूड और भूख को प्रभावित करता है। तनाव, मानसिक दबाव, नींद की कमी और असंतुलित खान-पान प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की तीव्रता बढ़ा सकते हैं।
PMS के लक्षण मुख्यतः हार्मोनल और न्यूरोट्रांसमीटर असंतुलन से जुड़े होते हैं। मासिक चक्र के दौरान एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बदलता है, जिससे शरीर में पानी और सोडियम का संतुलन प्रभावित होता है। सेरोटोनिन का स्तर मूड और भूख को प्रभावित करता है। तनाव, मानसिक दबाव, नींद की कमी और असंतुलित खान-पान प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम की तीव्रता बढ़ा सकते हैं।
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जानें क्या होता है PMS?
- फोटो : Adobe Stock
PMS को कम करने के उपाय
- संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना PMS को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करना फायदेमंद होता है।
- नियमित व्यायाम, योग और स्ट्रेचिंग हार्मोन संतुलन बनाए रखते हैं और मूड सुधारते हैं।
- स्ट्रेस कम करने के लिए ध्यान, गहरी सांस लेना या हॉबी अपनाना मददगार होता है।
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जानें क्या होता है PMS?
- फोटो : Adobe stock
क्या कहते हैं डॉक्टर?
यदि PMS के लक्षण गंभीर हों या रोजमर्रा की जिंदगी में बाधा डाल रहे हों, तो डॉक्टर से दवाइयां या सप्लीमेंट लेने की सलाह लेना चाहिए। सही दिनचर्या, स्वस्थ आहार और मानसिक संतुलन अपनाकर महिलाएं PMS के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती हैं और मासिक चक्र के दौरान आराम और ऊर्जा महसूस कर सकती हैं। बस इसमें कोई भी दवा बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के न लें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
यदि PMS के लक्षण गंभीर हों या रोजमर्रा की जिंदगी में बाधा डाल रहे हों, तो डॉक्टर से दवाइयां या सप्लीमेंट लेने की सलाह लेना चाहिए। सही दिनचर्या, स्वस्थ आहार और मानसिक संतुलन अपनाकर महिलाएं PMS के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकती हैं और मासिक चक्र के दौरान आराम और ऊर्जा महसूस कर सकती हैं। बस इसमें कोई भी दवा बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के न लें।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।