अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम जितना ही अच्छी नींद भी जरूरी है। मानसिक और शारीरिक दोनों सेहत को ठीक रखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को रोजाना रात में कम से कम 6-9 घंटे की अच्छी नींद जरूर लेने की सलाह देते हैं। अच्छी नींद को बेहतर स्वास्थ्य का संकेत भी माना जाता है।
Hypersomnia: क्या आपको भी बहुत ज्यादा नींद आती रहती है? कहीं ये किसी गंभीर समस्या का संकेत तो नहीं
अत्यधिक नींद आते रहने की समस्या
अत्यधिक नींद आने को हाइपरसोमनिया के नाम से जाना जाता है। पर्यावरणीय और दिनचर्या जैसे कारकों के अलावा अवसाद, नींद संबंधी विकार, दवाओं के दुष्प्रभाव, थायरॉयड विकार और कुछ प्रकार की गंभीर अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी बहुत अधिक नींद आने लगती है।
आमतौर पर, सामान्य से ज्यादा घंटे सोने और दिन के समय नींद आते रहने को हाइपरसोमनिया की समस्या माना जाता है। इसमें आपको थकान महसूस हो सकती है, या ऐसा लग सकता है जैसे आपकी आंखें थकी हुई हैं और उन्हें बार-बार बंद करने की जरूरत है।
वैसे तो अधिक नींद आने को ज्यादा गंभीर नहीं माना जाता है हालांकि कुछ कारणों पर ध्यान देना जरूरी है जो इसकी वजह हो सकती हैं।
कहीं ये दवाओं का साइड-इफेक्ट तो नहीं?
अत्यधिक नींद आने की समस्या कुछ प्रकार के दवाओं के साइड-इफेक्ट के कारण हो सकती है। विशेषतौर पर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करा रहे लोगों में ये दिक्कत अधिक देखी जाती रही है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ब्लड प्रेशर, अवसाद, नाक बंद होने (एंटीहिस्टामाइन), मिर्गी आदि का इलाज करा रहे लोगों को दवाओं के कारण अधिक नींद आने की दिक्कत बनी रह सकती है।
अगर आपको लगता है कि प्रिस्क्रिप्शन दवाओं के कारण आपको ज्यादा नींद आ रही है तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के कारण भी हो सकती है ये दिक्कत
कुछ प्रकार के न्यूरोलॉजिकल विकार जैसे नार्कोलेप्सी के शिकार लोगों को भी अक्सर या बहुत ज्यादा नींद आते रहने की दिक्कत हो सकती है। नार्कोलेप्सी की स्थिति मस्तिष्क की उस क्षमता को प्रभावित कर देती है जो सोने-जागने के चक्र को नियंत्रित करती है। रात के समय ऐसे रोगियों को अक्सर नींद टूटने (अनिद्रा के समान) की दिक्कत होती है। वहीं दिन में काम के समय अत्यधिक नींद आने का जोखिम बना रहता है।
नार्कोलेप्सी से पीड़ित लोग बातचीत के बीच में या भोजन करते-करते भी सो सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विकार
स्ट्रेस-एंग्जाइटी हो या अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य की समस्या, इसके शिकार लोगों को भी अक्सर नींद आते रहने की दिक्कत हो सकती है। अवसाद जैसी स्थितियां शरीर की ऊर्जा को कम कर देती हैं, जिससे अक्सर सुस्ती बनी रहती है और आपको नींद आती रह सकती है। अवसाद के रोगी अक्सर रात में ठीक से नहीं सो पाते हैं, तो उन्हें दिन में अत्यधिक नींद आती रहती है। मानसिक स्वास्थ्य विकारों का इलाज करा रहे लोगों को दवाओं के कारण भी बहुत ज्यादा नींद आती रहती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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