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Brain Rot: क्या होता है 'ब्रेन रॉट'? आपके ब्रेन के लिए रील स्क्रॉल करना कितना खतरनाक?

Fri, 30 Jan 2026 06:59 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Fri, 30 Jan 2026 06:59 PM IST
सार

आज के आधुनिक दौर बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें मोबाइल फोन की लत है। कई लोग घंटों सिर्फ रील्स देखने में समय खराब कर देते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये लत हमारे दिमाग धीरे-धीरे खोखला करती जा रही है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।

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What is Brain Rot? Why Oxford Named it Word of the Year and How Reels Affect Your Mental Health
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

Effects of Scrolling Reels on Brain: 'ब्रेन रॉट' एक ऐसा शब्द है जो आज की डिजिटल पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य की कड़वी हकीकत बयां करता है। इसका शाब्दिक अर्थ है 'दिमाग का सुस्त होना', जो लंबे समय तक सोशल मीडिया पर कम गुणवत्ता वाले, बिना किसी अर्थ के और अत्यधिक उत्तेजक कंटेंट (जैसे रील्स और शॉर्ट्स) देखने के कारण होने वाली मानसिक गिरावट को दर्शाता है।



इस शब्द की बढ़ती लोकप्रियता और प्रासंगिकता को देखते हुए, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने इसे वर्ष 2024 में 'वर्ड ऑफ द ईयर' घोषित किया। यह शब्द पहली बार इंटरनेट पर उभरा, लेकिन अब यह डिक्शनरी का हिस्सा बनकर उस स्थिति को परिभाषित करता है जहां व्यक्ति की सोचने, समझने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता क्षीण होने लगती है। 

जब हम घंटों रील स्क्रॉल करते हैं, तो हमारा मस्तिष्क सूचनाओं के अंतहीन प्रवाह में फंस जाता है, जिससे संज्ञानात्मक थकान और याददाश्त में कमी जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। आइए इस लेख में रील स्क्रॉल करने के कुछ साइड इफेक्ट जानते हैं।

What is Brain Rot? Why Oxford Named it Word of the Year and How Reels Affect Your Mental Health
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

रील स्क्रॉल करने की आदत और डोपामाइन लूप का साइंस
न्यूरोसाइंस के शोध बताते हैं कि रील्स का 'शॉर्ट-फॉर्म' फॉर्मेट मस्तिष्क में डोपामाइन का तेज प्रवाह पैदा करता है। इसे 'वेरिएबल रिवॉर्ड शेड्यूल' कहा जाता है, जो जुए की लत जैसा ही खतरनाक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जब हम हर 15 सेकंड में नया कंटेंट देखते हैं, तो मस्तिष्क का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स', जो निर्णय लेने और फोकस करने के लिए जिम्मेदार है, कमजोर होने लगता है, जिससे 'शॉर्ट अटेंशन स्पैन' की समस्या उत्पन्न होती है।


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What is Brain Rot? Why Oxford Named it Word of the Year and How Reels Affect Your Mental Health
मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik

मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है गहरा असर
हालिया शोधों से पता चला है कि अत्यधिक रील स्क्रॉलिंग से 'डिजिटल डिमेंशिया' का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग दिन में 3 घंटे से अधिक रील देखते हैं, उनमें चिंता, अवसाद और अकेलेपन के लक्षण उन लोगों की तुलना में अधिक पाए गए हैं जो रचनात्मक कार्यों में लगे रहते हैं। यह आदत मस्तिष्क के ग्रे मैटर के डेंसिटी को प्रभावित कर सकती है, जिससे सूचनाओं को प्रोसेस करने की गति धीमी हो जाती है।


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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : adobe stock

ब्रेन रॉट के लक्षण और पहचान के तरीके
ब्रेन रॉट के प्रमुख लक्षणों में शामिल है, चीजों को जल्दी भूल जाना, पढ़ते समय ध्यान न भटकना, और बिना फोन के खाली बैठने पर बेचैनी महसूस होना। शोध बताते हैं कि रील स्क्रॉलिंग के दौरान मस्तिष्क सक्रिय होने के बजाय केवल 'पैसिव ऑब्जर्वेशन' मोड में चला जाता है। इससे रचनात्मक सोच खत्म हो जाती है और व्यक्ति हर समय मानसिक रूप से थका हुआ महसूस करता है, भले ही उसने कोई शारीरिक मेहनत न किया हो।

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डिजिटल डिटॉक्स करें - फोटो : adobe stock

डिजिटल डिटॉक्स और सावधानी ही है एकमात्र उपाय
ब्रेन रॉट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, मगर इसे समय रहते रोकना जरूरी है। मनोवैज्ञानिकों इससे समस्या से बचने के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' करने का सुझाव देते हैं और रील देखने के लिए दिन में केवल 20-30 मिनट का समय निर्धारित करें। सोने से एक घंटे पहले स्क्रीन से दूरी बनाना और गहरी सोच वाले कार्यों (जैसे किताब पढ़ना) में समय बिताना आपके मस्तिष्क को फिर से स्वस्थ बना सकता है। ध्यान रखें कि तकनीक का उपयोग करें, उसे खुद पर हावी न होने दें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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