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Breast Cancer: क्या 20 की उम्र में भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर? कम आयु में क्यों बढ़ गया है जोखिम, जानिए सबकुछ

Sun, 30 Jun 2024 07:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sun, 30 Jun 2024 07:24 PM IST
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What causes breast cancer in your 20s and 30s know its risk factor and causes in hindi
स्तन कैंसर के मामले - फोटो : istock

ब्रेस्ट कैंसर, दुनियाभर में महिलाओं में होने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर है। भारत में भी इसका जोखिम तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। स्तन में किसी प्रकार की गांठ या कुछ असामान्य नजर आता है तो समय रहते डॉक्टर से इस बारे में सलाह जरूर ले लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में स्तन कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है, पर कम उम्र से ही इसके जोखिमों को लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।



सभी महिलाओं को नियमित रूप से स्तनों की जांच करते रहना चाहिए। अगर स्तन में किसी प्रकार की गांठ या कुछ असामान्य नजर आता है तो सावधान हो जाएं।

हाल ही में अभिनेत्री हिना खान ने बताया कि उन्हें स्टेज थ्री का ब्रेस्ट कैंसर है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 20-30 की आयु वालों में भी इसका खतरा हो सकता है? कौन से कारण है जो कम आयु वालों में स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं? आइए इस बारे में जानते हैं?

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कम उम्र में स्तन कैंसर - फोटो : istock

नियमित रूप से जांच जरूरी

अमेरिकन कैंसर एसोसिएशन सभी महिलाओं को नियमित रूप से कैंसर की खुद से जांच करते रहने और मैमोग्राम स्क्रीनिंग की सलाह देता है। अगर आप सोचती हैं कि स्तन कैंसर होने के लिए आपकी उम्र बहुत छोटी हैं तो यहां सावधान हो जाने की जरूरत है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो 20-30 की उम्र में महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले दुर्लभ हैं, लेकिन जिस तरह से लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी देखी जा रही है अब इसके खतरों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

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कैंसर का खतरा - फोटो : istock

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

येल मेडिसिन में रेडियोलॉजिस्ट और ब्रेस्ट इमेजिंग की विशेषज्ञ डॉ लीवा आंद्रेजेवा-राइट कहती हैं, 20 और इससे कम आयु वाली महिलाओं में भी स्तन कैंसर के मामलों का निदान किया जा रहा है। 

कुछ प्रकार के स्तन कैंसर युवा महिलाओं अधिक देखे जा रहे हैं। वैसे तो स्तन कैंसर का निदान आमतौर पर रजोनिवृत्ति के बाद की उम्र वाली महिलाओं में देखा जाता रहा है पर हमें इसके जोखिमों को लेकर युवावस्था से ही सतर्कता बरतते रहने की जरूरत है। डॉ लीवा कहती हैं, मैंने 20 की उम्र की महिलाओं में भी स्तन कैंसर का निदान किया है।

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कैंसर की समय पर जांच जरूरी - फोटो : istock

11% मामले 45 से कम आयु में

रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, सभी स्तन कैंसरों में से लगभग 11% मामले 45 वर्ष से कम आयु में रिपोर्ट किए जाते हैं। हर साल 40 वर्ष से कम आयु की 1,000 से अधिक महिलाओं की स्तन कैंसर से मौत हो जाती है। समय रहते अगर कैंसर का निदान हो जाए तो इसका उपचार होना और रोगी के जान बचने की संभावना बढ़ सकती है।

येल मेडिसिन में रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आंद्रेजेवा-राइट का कहते हैं आपको मैमोग्राम किस उम्र से शुरू करना चाहिए, इस बारे में डॉक्टर से जरूर सलाह ले लें। स्तन में किसी प्रकार का बदलाव दिखता है, कोई गांठ है तो अपने डॉक्टर को बताएं। समय रहते क्लिनिकल जांच और इमेजिंग के माध्यम से कैंसर के खतरे का पता लगाने में मदद मिल सकती है। 

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कैंसर के खतरे को पहचानिए - फोटो : istock

कम उम्र में बढ़ते कैंसर के क्या कारण हैं?

स्तन कैंसर तब होता है जब स्तन में कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं। यह अक्सर कोशिकाओं में डीएनए में परिवर्तन के कारण होता है। हालांकि ऐसा क्यों होता है इसका सटीक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि हार्मोन, पर्यावरणीय कारक और आनुवंशिकी जैसी स्थितियां इसके जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। लगभग 5% से 10% स्तन कैंसर वंशानुगत जीन उत्परिवर्तन से जुड़े होते हैं।

इसके अलावा कुछ आदतें भी इसके खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

  • शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना।
  • रजोनिवृत्ति के बाद मोटापा या अधिक वजन होना।
  • 5 साल से ज्यादा समय तक हॉरमोन रिप्लेसमेंट थेरेपी लेना।
  • बच्चे को स्तनपान न कराना।
  • शराब-धूम्रपान की समस्या।
  • रात में देर से सोना, जिससे हॉर्मोन में बदलाव हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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