आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जब आप दोस्तों के साथ होते हैं तो भूख से भी ज्यादा खाना खा लेते हैं। दरअसल, पहली बार इसकी वजह पर एक अध्ययन हुआ है। इस अध्ययन में दोस्तों के साथ होने पर ज्यादा खाने के पीछे के असल कारण को मनोविज्ञान (साइकॉलोजी) से जोड़ा गया है। अध्ययन को बर्मिंघम यूनिवर्सिटी ने किया है और अमेरिका के क्लिनिकल न्यूट्रिशन जर्नल ने इसे प्रकाशित किया है। इसमें खाने की खपत की सामाजिक सुविधा पर हुए 42 पुराने विश्लेषणों को भी शामिल किया गया है। इसके बाद इंग्लैंड की बर्मिंघन यूनिवर्सिटी ने इस आदत को प्रागैतिहासिक भोजन के लिए घूमने की रणनीति से जोड़ा है और इसके पीछे की वजह के लिए हमारे पुरखों को जिम्मेदार ठहराया है। दरअसल, हमारे पूर्वज किसी जमाने में भोजने की खोज के लिए समूह में घूमा करते थे और उसके बाद परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करते थे।
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भूख ना होने पर भी दोस्तों के साथ आप भी खा लेते हैं ढेर सारा खाना, तो हैरान ना हों, ये है वजह
Fri, 29 Nov 2019 05:18 PM IST
ललित फुलारा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Fri, 29 Nov 2019 05:18 PM IST
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खाना
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ऐसे में हमारी इस आदत की असल वजह उसी सामूहिकता से जुड़ी हुई है। इस अध्ययन के निष्कर्ष कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति अकेले खाने की जगह किसी समूह में बैठकर या दोस्तों के साथ खाना खाता है तो वो 29 से लेकर 48 फीसदी तक ज्यादा खाना खा लेता है। यानी की वो ज्यादा खाना खाता है। इसी तरह, एक ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक सोसायटी के अध्ययन का कहना है कि जब कोई व्यक्ति अपने दोस्तों के साथ बैठकर खाना खाता है तो वह 23 फीसदी ज्यादा फूड ग्रहण करता है।
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क्या है कारण?
दरअसल, हमारी सामाजिक सहूलियत जिसे हम सामाजिकता कह सकते हैं उसकी वजह से व्यक्ति ज्यादा खाना खाता है। जबकि अगर उसे अकेले खाना हो तो वह कम खाना खाता है। हालांकि इस अध्ययन में इस बात को स्पष्ट तौर पर रेखांकित नहीं किया गया है कि अगर व्यक्ति अजनबियों के समूह में बैठकर खाना खाता है तो क्या वह ज्यादा खाएगा या फिर उसके भोजन ग्रहण करने की क्षमता प्रभावित होगी। लेकिन इतना स्पष्ट किया गया है कि जब हम अपने जानने वाले या दोस्तों के समूह में होते हैं तो ज्यादा खाना खाते हैं। यह अध्ययन कहता है कि सामूहिकता आज भी हमारे आहार व्यवहार को प्रभावित करती है।
दरअसल, हमारी सामाजिक सहूलियत जिसे हम सामाजिकता कह सकते हैं उसकी वजह से व्यक्ति ज्यादा खाना खाता है। जबकि अगर उसे अकेले खाना हो तो वह कम खाना खाता है। हालांकि इस अध्ययन में इस बात को स्पष्ट तौर पर रेखांकित नहीं किया गया है कि अगर व्यक्ति अजनबियों के समूह में बैठकर खाना खाता है तो क्या वह ज्यादा खाएगा या फिर उसके भोजन ग्रहण करने की क्षमता प्रभावित होगी। लेकिन इतना स्पष्ट किया गया है कि जब हम अपने जानने वाले या दोस्तों के समूह में होते हैं तो ज्यादा खाना खाते हैं। यह अध्ययन कहता है कि सामूहिकता आज भी हमारे आहार व्यवहार को प्रभावित करती है।
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यह अध्ययन यह भी कहता है कि कई लोगों को ऐसा भी देखा गया है कि जो अजनबियों के बीच में कम खाना खा पाते हैं। यानी की ऐसे लोग किसी अजनबी समूह में अपनी भूख से कम खाना खाते हैं। यह पाया गया है कि महिलाएं जब पुरुषों की कंपनी में होती हैं तो वह यह परवाह किए बिना की पुरुष अपनी पहचान का है या अजनबी खाना कम ही खाती हैं। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि मोटापे से ग्रसित लोग दूसरे लोगों के साथ खाना खाते वक्त 18 फीसदी तक कम खा सकते हैं।